Advertisement
बिजनेस
Trending

कर्नाटक में IPL टिकट पर सियासी घमासान

Advertisement
Advertisement

आईपीएल 2026 की शुरुआत से पहले कर्नाटक में टिकटों को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के कई विधायकों ने आरोप लगाया कि उन्हें मैच के टिकट पाने में परेशानी हो रही है और उन्हें आम लोगों की तरह लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए कई विधायकों ने खुद को “VIP” बताते हुए विशेष व्यवस्था और मुफ्त टिकट की मांग की।

यह मुद्दा विधानसभा तक पहुंच गया, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने इस पर चर्चा की। विधायकों का कहना था कि वे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, इसलिए उन्हें कम से कम कुछ VIP पास और अलग बैठने की व्यवस्था मिलनी चाहिए। कुछ नेताओं ने तो यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) टिकटों के मामले में पारदर्शिता नहीं रख रहा और महंगे दाम वसूले जा रहे हैं।

विवाद बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और सरकार को निर्देश दिया कि इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए। इसके बाद सरकार और संबंधित अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, जिसमें अंततः यह सहमति बनी कि विधायकों को IPL मैचों के लिए सीमित संख्या में VIP टिकट उपलब्ध कराए जाएंगे। ताजा जानकारी के मुताबिक प्रत्येक विधायक को दो VIP टिकट देने पर सहमति बनी है, ताकि विवाद को शांत किया जा सके।

हालांकि इस फैसले के बाद भी विवाद पूरी तरह थमा नहीं है। विपक्षी नेताओं और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे “VIP कल्चर” को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि जब आम लोग टिकट के लिए संघर्ष करते हैं, तब जनप्रतिनिधियों को विशेष सुविधा देना गलत संदेश देता है।

वहीं, सरकार के कुछ नेताओं ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि विधायकों को यह सुविधा उनके पद और जिम्मेदारियों के कारण दी जाती है। उनका तर्क है कि जनप्रतिनिधियों को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेना होता है, इसलिए उन्हें कुछ विशेष व्यवस्थाएं मिलना स्वाभाविक है।

गौरतलब है कि Indian Premier League 2026 28 मार्च से शुरू हो रहा है और देशभर में इसके टिकटों की भारी मांग है। ऐसे में कर्नाटक में उठा यह विवाद VIP संस्कृति बनाम आम जनता के अधिकारों की बहस को और तेज कर रहा है।

कुल मिलाकर, IPL जैसे बड़े आयोजन से पहले यह विवाद केवल टिकटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मुद्दे को कैसे संतुलित करती है और क्या इस तरह की मांगें भविष्य में भी उठती रहेंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share