
सोना और चांदी हुए सस्ते, कीमतों में बड़ी गिरावट से खरीदारों को राहत
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। लगातार तेजी के बाद आए इस करेक्शन ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को भी राहत दी है। खासकर चांदी की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिली है, जबकि सोने के दाम भी प्रति 10 ग्राम के हिसाब से उल्लेखनीय रूप से नीचे आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुख, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की बदली हुई रणनीति का असर है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। साथ ही यह संभावना भी मजबूत हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या फिर बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरों का असर आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर पड़ता है, जिसके चलते इनकी कीमतों में दबाव देखने को मिलता है।
घरेलू बाजार में भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों का सीधा असर दिखाई दिया। चांदी की कीमत में एक दिन के भीतर हजारों रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी लगभग 1,600 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ। इससे शादी-ब्याह के सीजन की तैयारी कर रहे ग्राहकों और ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए बेहतर अवसर माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है, इसलिए निवेश करते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए।
बुलियन बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह से सोने और चांदी की कीमतों में काफी अस्थिरता बनी हुई है। कभी तेज उछाल तो कभी अचानक गिरावट के कारण निवेशकों के लिए सही समय चुनना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उनका मानना है कि मौजूदा गिरावट को कुछ निवेशक खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं, जबकि कई लोग अभी बाजार की अगली दिशा का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क, स्थानीय मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का भी इस पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। वहीं चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग का असर अधिक होता है, क्योंकि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में बदलाव का असर चांदी पर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देता है।
ज्वेलरी बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना रहता है तो आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या निवेशक दोबारा सुरक्षित निवेश की ओर लौटते हैं तो सोना और चांदी फिर से मजबूती दिखा सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को बाजार की चाल, वैश्विक घटनाक्रम और दैनिक भावों पर नजर रखते हुए ही निवेश या खरीदारी का निर्णय लेना चाहिए।



