
Allahabad High Court से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जुड़े चर्चित रेप और POCSO मामले में Allahabad High Court ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया, जिसमें स्वामी के साथ उनके शिष्य को भी राहत प्रदान की गई। यह आदेश उस याचिका पर आया, जिसमें दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट से संरक्षण मांगा था।
मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिसमें स्वामी और उनके शिष्य पर नाबालिग बच्चों के यौन शोषण (POCSO एक्ट के तहत) के आरोप लगाए गए हैं। यह FIR प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज की गई थी, जो विशेष POCSO अदालत के निर्देश पर दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि महाकुंभ और माघ मेले के दौरान नाबालिगों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुईं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और इस स्तर पर गिरफ्तारी जरूरी नहीं है, इसलिए आरोपियों को अग्रिम जमानत दी जाती है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत केवल जांच के दौरान है और इससे मामले के ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने शर्त रखी कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेंगे, गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह मामला झूठा है और आरोपों में देरी से FIR दर्ज की गई, साथ ही बयानों में भी कई बदलाव (inconsistencies) हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम राहत देना उचित समझा। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी।
गौरतलब है कि इससे पहले 27 फरवरी को ही हाईकोर्ट ने स्वामी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी और फैसले को सुरक्षित रख लिया था। अब अंतिम आदेश में उन्हें अग्रिम जमानत मिल गई है, जिससे उन्हें फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
इस मामले ने धार्मिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। एक तरफ जहां आरोप बेहद गंभीर हैं, वहीं दूसरी ओर अदालत ने संतुलन बनाते हुए जांच जारी रखते हुए आरोपी को राहत दी है। अब आगे की जांच और ट्रायल में ही यह तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और सच्चाई क्या है।



