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मध्य पूर्व संकट पर ऑस्ट्रेलिया की स्पष्ट रुख

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मध्य पूर्व में हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद ईरान के साथ चल रहा संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है। इस पर विश्व के कई देशों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रखी है, लेकिन इस बीच Australia ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस युद्ध में किसी भी सैन्य भागीदारी में शामिल नहीं होगा और उसकी कोई योजना नहीं है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पैनी वोंग ने कहा है कि देश मध्य पूर्व के मुद्दों में सीधे शामिल नहीं है और उसके पास वहां कोई सैनिक युद्ध में भेजने का इरादा नहीं है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया ने वहाँ फंसे लगभग 1,15,000 अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए चिंता जताई है और एयरस्पेस बंद होने के कारण सहायता के विकल्पों पर काम कर रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी भी सैन्य संघर्ष में भाग नहीं लेगी, लेकिन साथ ही US और Israel द्वारा अपनाई गई कार्रवाई को रोकने या समर्थन देने से जुड़ी अपनी नीतियों को विस्तार से बताया है। इसके तहत प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानिज़े और विदेश मंत्री ने संयुक्त बयान में कहा कि वे “संयुक्त राज्य अमेरिका को समर्थन देते हैं ताकि ईरान परमाणु हथियार प्राप्त ना कर सके” और यह मानते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक शांति के लिए खतरा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया क्षेत्रीय मामलों में सीधा हस्तक्षेप नहीं करना चाहता।

इस बीच तनाव बढ़ने से पर्यटन और वाणिज्यिक उड़ानों पर भी भारी प्रभाव पड़ा है। मध्य पूर्व में जारी हमलों के कारण कतर, दुबई और अबू धावी सहित कई प्रमुख हवाई मार्गों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द और कई यात्री फंसे हुए हैं। ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा न करें और यदि सुरक्षित हो तो क्षेत्र छोड़ दें, क्योंकि एयरस्पेस बंद होने की वजह से वापसी के विकल्प सीमित हैं।

आर्थिक मोर्चे पर भी संकट का असर दिख रहा है। ऑस्ट्रेलियाई वित्तीय बाजार में, इस संघर्ष और इससे जुड़े वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के डर के कारण स्टॉक इंडेक्स में गिरावट तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी देखी जा रही है, जिससे स्थानीय मौद्रिक और ऊर्जा बाजार अस्थिर हो रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया की इस दो-तरफा रणनीति — जहां एक ओर वह अमेरिका और इज़राइल के क़दमों को “वैश्विक सुरक्षा के हित में” समझने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर युद्ध में प्रत्यक्ष भागीदारी से साफ़ दूरी बना रहा है — ने वैश्विक राजनयिक मानचित्र पर कई बहसें पैदा कर दी हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मकसद आम तौर पर सैन्य तनाव को बढ़ाये बिना अपने सहयोगियों के साथ सामंजस्य बनाये रखना है, जबकि आलोचक इसका उपयोग “कूटनीतिक समानता” के रूप में कर रहे हैं।

मध्य पूर्व युद्ध के फैलने और इसके परिणामों को देखते हुए, ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों को सुरक्षा सलाह जारी की है तथा उन्हें यात्रा पर प्रतिबंधित करने के संकेत भी दिये हैं, इस संघर्ष के संभावित मानवीय और राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में रखते हुए। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा क्षेत्र में एक छोटे से कदम का भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जब बात मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र की हो।

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