
नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। 35 वर्षीय रैपर-से-राजनेता बने बालेन शाह (Balendra Shah) ने संसदीय चुनाव में देश के चार बार के प्रधानमंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता केपी शर्मा ओली को भारी अंतर से पराजित कर दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार शाह ने झापा-5 सीट पर लगभग 68 हजार से अधिक वोट हासिल किए, जबकि ओली करीब 18 हजार वोटों तक ही सिमट गए। इस तरह शाह ने लगभग 50 हजार मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिसे नेपाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।
बालेन शाह पहले एक लोकप्रिय रैपर और इंजीनियर के रूप में जाने जाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और तेजी से लोकप्रिय हो गए। 2022 में काठमांडू के मेयर बनने के बाद उनकी छवि एक युवा और बदलाव की राजनीति करने वाले नेता के रूप में उभरी। इसी लोकप्रियता के आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party) के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और पारंपरिक राजनीतिक दलों को कड़ी चुनौती दी। उनके अभियान में खास तौर पर युवाओं की बड़ी भूमिका रही और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने बड़े पैमाने पर समर्थन हासिल किया।
नेपाल में यह चुनाव पिछले वर्ष हुए बड़े युवा आंदोलनों के बाद आयोजित हुआ था। 2025 में भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ जनता का गुस्सा साफ दिखाई देने लगा था। इस माहौल में बालेन शाह जैसे नए और युवा चेहरे को व्यापक समर्थन मिला। चुनाव परिणामों से यह भी संकेत मिला है कि नेपाली मतदाता अब पारंपरिक दलों से हटकर नई राजनीति की ओर रुख कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं बल्कि नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। उनकी पार्टी कई सीटों पर आगे चल रही है और अगर वह बहुमत हासिल करने या गठबंधन बनाने में सफल हो जाती है, तो शाह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में से एक बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, नेपाल के इस चुनाव ने देश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। एक तरफ अनुभवी और लंबे समय से सत्ता में रहे नेताओं को चुनौती मिली है, वहीं दूसरी तरफ युवा नेतृत्व और नई राजनीतिक सोच को जनता का मजबूत समर्थन मिला है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बालेन शाह और उनकी पार्टी देश की राजनीति और नीतियों में किस तरह के बदलाव लाती है।



