
लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘वीबी जी राम जी’ कानून की मजबूती और ग्रामीण विकास पर जोर
लखनऊ से बड़ी राजनीतिक और विकास से जुड़ी खबर आई है जहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लोकभवन, लखनऊ में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नए ‘विकसित भारत-वीबी जी राम जी’ कानून, 2025 (VB-G RAM G Bill, 2025) के बारे में विस्तार से जानकारी दी और इसके सकारात्मक पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने इस बिल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम बताया। कहा गया कि यह कानून, पारदर्शी प्रक्रिया और बेहतर कार्यान्वयन के माध्यम से ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा और “विकसित भारत” की संकल्पना को साकार करेगा।
योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि इस नए कानून का लक्ष्य केवल एक योजना बदलना नहीं है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रोजगार के अवसरों को बढ़ाना और पारदर्शी व जवाबदेही आधारित सिस्टम तैयार करना है, ताकि गांवों में रहने वाले लाखों परिवारों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार पाने का अवसर मिले। उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल पुराने भ्रष्टाचार और विफल योजनाओं का समर्थन कर रहे हैं, जबकि केंद्र और राज्य सरकारें विकास और पारदर्शिता के लिए काम कर रही हैं।
इस कानून को लोकसभा से पारित कर संसद में मंज़ूरी भी दी जा चुकी है, जिससे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को नए नाम, नए रूप और नए दिशानिर्देशों के तहत बदल दिया गया है। पारित बिल के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया और बिल की प्रतियाँ फाड़ने तक की कार्रवाई की थी, जिसमें यह गंभीर राजनीतिक विवाद भी बन गया था।
केंद्रीय और राज्य स्तर पर लंबे समय से विवादित रहे MGNREGA को बदलकर ला रहा यह नया VB-G RAM G बिल ग्रामीण रोजगार को 125 दिनों की कानूनी गारंटी देने का दावा करता है, हालांकि विपक्ष और आलोचकों का आरोप है कि इससे मनरेगा जैसी वास्तविक “अनुपूरक मांग-आधारित रोजगार प्रणाली” कमजोर होगी और इससे ग्रामीण मजदूरों को मूल रूप से मिलने वाले संवैधानिक रोजगार अधिकार प्रभावित होंगे।
सीएम योगी ने अपने बयान में तीन अहम बिंदुओं पर ज़ोर दिया — सबसे पहले, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास; दूसरे, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना; और तीसरे, योजना की पारदर्शिता तथा जवाबदेही को सुनिश्चित करना — ताकि देश के ग्रामीण विकास लक्ष्यों को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत तभी साकार हो सकता है जब राज्य और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र मजबूत होंगे”।
राजनीतिक तौर पर भी यह विषय बड़ा महत्वपूर्ण बन चुका है। जहां केंद्रीय नेतृत्व और राज्य स्तर पर भाजपा इसका पक्ष मजबूत कर रही है और बूथ स्तर तक इसके फायदों को आम जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों द्वारा इसे मनरेगा को कमजोर करने वाला और ग्रामीण रोजगार के अधिकारों पर हमला मानकर विरोध किया जा रहा है तथा सड़कों पर तथा विधानसभा स्तर पर विरोध प्रदर्शन और विशेष संकल्प प्रस्ताव भी सामने आए हैं।
कुल मिलाकर, यह नया कानून और उससे जुड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस भारत के ग्रामीण विकास और रोजगार सुरक्षा के भविष्य को केंद्र में रखकर चल रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम बताता है और विपक्ष इसे मूल सामाजिक सुरक्षा को घटाने वाला निर्णय मानता है।



