
कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा होते ही कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा
त्योहारी सीजन में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘महंगाई मैन’ बताया और आरोप लगाया कि सरकार ने इस साल कारोबारियों पर गैस की बढ़ती कीमतों का बोझ डाला है। कांग्रेस ने 1 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में दावा किया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में इस बार 17 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पार्टी के मुताबिक, साल की शुरुआत में जो सिलेंडर 1,684 रुपये का था, उसकी कीमत अब 2,971 रुपये तक पहुंच गई है। कांग्रेस ने दावा किया कि पिछले 10 महीनों में कमर्शियल सिलेंडर कुल 1,287 रुपये महंगा हुआ है। पार्टी ने इस बढ़ोतरी के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि आम जनता और कारोबारियों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।
तेल कंपनियों ने 1 नवंबर से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में अलग-अलग शहरों में बढ़ोतरी की है। दिल्ली में इसकी कीमत 10 रुपये बढ़कर 2,820 रुपये हो गई है। कोलकाता में सिलेंडर की कीमत 2,971 रुपये तक पहुंच गई है। चेन्नई में 11.50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 2,994.50 रुपये हो गई है। मुंबई में भी कीमत बढ़ाई गई है।
हालांकि, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 1 नवंबर को कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये बनी हुई है। यानी इस बार की बढ़ोतरी का सीधा असर कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर पड़ेगा, घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, मिठाई की दुकानों और कैटरिंग कारोबार में होता है। ऐसे में गैस की कीमत बढ़ने से इन व्यवसायों की परिचालन लागत में इजाफा हो सकता है। कारोबारियों के सामने अब यह चुनौती होगी कि वे बढ़े हुए खर्च को खुद वहन करें या खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बदलाव करें। हालांकि, ग्राहकों पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह कारोबार और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
गौरतलब है कि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में इससे पहले 1 अक्टूबर को भी बढ़ोतरी की गई थी। उस समय दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम 62.50 रुपये बढ़ाए गए थे। सितंबर में भी कीमतों में 9.50 रुपये की वृद्धि हुई थी। इससे पहले जुलाई और अगस्त में कीमतों में कटौती की गई थी। यानी पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
कमर्शियल एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के बेंचमार्क और रुपये-डॉलर की विनिमय दर जैसे कारकों के आधार पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। तेल कंपनियां आमतौर पर महीने की पहली तारीख को नई दरें लागू करती हैं। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में स्थानीय करों और अन्य लागतों के कारण सिलेंडर की कीमतों में अंतर रहता है।
फिलहाल गैस की कीमतों को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने बढ़ती कीमतों को महंगाई से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार के बदलावों के आधार पर तय होती हैं। इस बढ़ोतरी का वास्तविक असर आने वाले दिनों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य कारोबारों की लागत तथा ग्राहकों के बिलों में देखने को मिल सकता है।



