
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य का ऐसा नक्शा सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को “NEW US Territory” यानी “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया है। ट्रंप की इस पोस्ट से ईरान के साथ पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है। यह वही जलडमरूमध्य है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप ने यह नक्शा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर शेयर किया। इस पोस्ट में उन्होंने कोई विस्तृत कैप्शन नहीं लिखा, लेकिन नक्शे पर होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। ट्रंप इससे पहले भी इस तरह की बात कह चुके हैं। अगस्त में उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान की हार के बाद अमेरिका होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर सकता है। इसके बाद 18 अगस्त को भी उन्होंने इसी तरह का नक्शा पोस्ट किया था और अब दोबारा इसे शेयर किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब 1/5 तेल और LNG निर्यात का समुद्री परिवहन इसी मार्ग से होता था। ऐसे में इस समुद्री रास्ते पर किसी भी तरह की सैन्य या राजनीतिक रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
ईरान ने होर्मुज पर अपने नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए अनुमति और ट्रांजिट शुल्क जैसी शर्तें लागू की हैं। दूसरी ओर, ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है। इस विरोधाभासी स्थिति ने क्षेत्र में समुद्री आवाजाही को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।
ट्रंप की ओर से होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने की बात को ईरान ने स्वीकार नहीं किया है। ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए इसे अवास्तविक और भ्रामक बताया है। तेहरान का रुख है कि जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं और ईरान से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति में बदलाव नहीं करता, तब तक होर्मुज को पूरी तरह खोलने को लेकर सहमति मुश्किल है।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव की नीति अपनाई है। दूसरी तरफ ईरान ने चेतावनी दी है कि जो देश अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल होंगे, उन्हें भी दुश्मन माना जा सकता है। इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है।
होर्मुज को लेकर बढ़ता विवाद भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है और खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र है। यदि होर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर ईंधन की कीमतों, परिवहन लागत तथा महंगाई पर पड़ सकता है।
अमेरिका की ओर से होर्मुज को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाने वाला नक्शा फिलहाल एक राजनीतिक और रणनीतिक दावा है, इससे यह नहीं माना जा सकता कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस समुद्री मार्ग पर संप्रभुता हासिल कर ली है। जलडमरूमध्य की वास्तविक कानूनी स्थिति और उस पर किसी देश के अधिकार का सवाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और संबंधित देशों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट को औपचारिक रूप से क्षेत्र के अमेरिकी कब्जे या संप्रभुता की घोषणा मानना सही नहीं होगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर तनाव किस दिशा में जाता है। ट्रंप के लगातार आक्रामक बयानों और ईरान के कड़े जवाबों के बीच यह समुद्री मार्ग वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बन गया है। अगर दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर मध्य पूर्व की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।



