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राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने चीन, 2020 चुनाव और ईरान युद्ध पर किए बड़े दावे

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार रात राष्ट्र के नाम अपने प्राइमटाइम संबोधन में कई बड़े मुद्दों को उठाते हुए चीन, वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव, चुनावी सुरक्षा और ईरान युद्ध पर विस्तृत टिप्पणी की। करीब एक घंटे के इस संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए कुछ गोपनीय दस्तावेजों से ऐसे संकेत मिले हैं कि चीन ने वर्ष 2020 के अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय उपलब्ध कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां उन्हें नहीं दी गईं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को दबाया गया।

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की चुनावी व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत है। उन्होंने मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों को सख्त करने, नागरिकता सत्यापन को अनिवार्य बनाने और चुनावी प्रणाली में व्यापक सुधार की वकालत की। ट्रंप ने कांग्रेस से लंबित चुनाव सुधार विधेयक को पारित करने की अपील भी की। हालांकि विपक्षी नेताओं ने उनके दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2020 के चुनावों में धांधली के आरोप पहले भी कई बार लगाए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें अदालतों और आधिकारिक जांचों में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।

चीन को लेकर ट्रंप ने कहा कि विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े मामलों की पूरी जांच की जानी चाहिए और यदि किसी देश की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पूर्व रिपोर्टों में यह निष्कर्ष सामने आया था कि वर्ष 2020 के चुनाव परिणामों को बदलने के लिए किसी विदेशी शक्ति द्वारा मतदान प्रणाली से छेड़छाड़ के प्रमाण नहीं मिले थे। इसी वजह से ट्रंप के ताजा दावों को लेकर राजनीतिक और विशेषज्ञों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।

राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान युद्ध का भी उल्लेख किया और कहा कि अमेरिकी सेना अपने रणनीतिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने प्रशासन की विदेश नीति का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि युद्ध और बढ़ती ऊर्जा कीमतों को लेकर जनता के बीच चिंता बनी हुई है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार घरेलू मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए चुनावी सुरक्षा जैसे विषयों को प्रमुखता दे रही है।

इस संबोधन के दौरान ट्रंप ने चुनावी पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोकतंत्र में लोगों का विश्वास बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने उनके भाषण की आलोचना करते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास बढ़ा सकते हैं। कई प्रमुख मीडिया संस्थानों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी भाषण के दौरान किए गए कुछ दावों की तथ्यात्मक जांच की आवश्यकता बताई।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप का यह संबोधन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे चुनावी सुरक्षा, विदेश नीति और चीन के साथ अमेरिका के संबंधों पर राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में कांग्रेस, विपक्ष और विभिन्न सरकारी एजेंसियों की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ट्रंप द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों और लगाए गए आरोपों पर आगे क्या आधिकारिक कार्रवाई होती है और उनका राजनीतिक प्रभाव कितना व्यापक रहता है।

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