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बाढ़ में बहकर पाकिस्तान पहुँचे 7 भारतीय

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बाढ़ की तेज़ धार में बहकर पाकिस्तान चले गए सात भारतीय नागरिक ढाई साल बाद भारत वापस लौट आए हैं। यह घटना 2023 की भीषण बाढ़ के दौरान हुई थी, जब पंजाब और आसपास के इलाक़ों में अचानक आई बाढ़ के कारण सतलुज नदी सहित नदियाँ उफान पर थीं और कई लोग अपने जानवरों को बचाने या सुरक्षित स्थान की ओर जाते समय अनजाने में सीमा पार कर पाकिस्तान पहुँच गए थे। इन सातों भारतीयों की आज सुबह अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से भारत वापसी हुई, जहाँ उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा गया।

पाकिस्तान सरकार ने इन सात नागरिकों की रिहाई का आदेश जारी किया, जिसे दोनों देशों के अधिकारियों के बीच औपचारिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद लागू किया गया। उनके वापस लौटने पर अटारी-वाघा सीमा पर भावनात्मक माहौल देखा गया, जहाँ परिवारों और अधिकारियों ने उन्हें स्वागत किया। इन सातों में चार व्यक्ति फिरोजपुर जिले से, एक जालंधर का, एक लुधियाना का और एक उत्तर प्रदेश का निवासी था।

वापसी के बाद बयान देते हुए एक लौटे भारतीय ने बताया कि बाढ़ के पानी की तेज़ धार ने उन्हें सीमा पार करवा दिया और पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन पर जानबूझकर सीमा क्रॉस करने का मामला दर्ज कर दिया, जिससे उन्हें जेल जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि लगभग तीन महीने तक उन्हें पाकिस्तानी जेल में रखा गया, जहां उनके साथ कथित रूप से कठिन परिस्थितियों और मारपीट जैसी घटनाएँ हुईं। कुछ कैदियों की हालत भी गंभीर थी — कुछ के पैर ख़राब हो गए और कुछ अंधे हो गए, उन्होंने दावा किया।

रिहा किये गए नागरिकों ने यह भी बताया कि पाकिस्तान में अभी भी कई भारतीय कैदी और मानसिक अस्पताल में रखे गए लोग हैं, जिनकी स्थिति अच्छी नहीं है। उन्होंने भारत सरकार से उन सभी को भी वापस लाने का आग्रह किया, ताकि उनके परिवार उन्हें घर ले जा सकें और उनका पुनर्वास हो सके।

विश्लेषकों के अनुसार, इन भारतीयों की वापसी मानवीय पहल और कूटनीतिक वार्ताओं का परिणाम है, जिसमें भारत सरकार ने लगातार प्रयास किये कि अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा सके। इस प्रक्रिया में दोनों देशों के उच्च-स्तरीय अधिकारियों के बीच संवाद और कागज़ी कार्यवाही की त्वरित पुष्टि शामिल रही, जिससे उनकी रिहाई संभव हो पाई।

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष का बयान नहीं है, बल्कि यह मानव सुरक्षा, सीमा-पार आपदाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जटिलता को भी उजागर करती है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में सीमा-पार बसने और लौटने जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय नागरिकों को कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इन सातों नागरिकों की वापसी से स्पष्ट होता है कि कठिन परिस्थितियों में मानवीय पहल और देश की सरकारों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है, और ऐसे मामलों में सहयोग और समझौतों की आवश्यकता कितनी ज़्यादा होती है। अब इन भारतीयों को अपने परिवारों के बीच पुनः शामिल होने का मौका मिला है, लेकिन उनके अनुभव ने यह भी दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा के समय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के उपायों को मजबूत करने की ज़रूरत कितनी अहम है।

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