
ग्वालियर पुलिस ने OG गांजे की सप्लाई करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए दिल्ली के पालम इलाके से मुख्य सप्लायर प्रिंस उर्फ आर्यन जायसवाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी सड़क या ट्रेन के बजाय फ्लाइट के जरिए अलग-अलग शहरों में OG गांजे की खेप पहुंचाने का नेटवर्क चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, दिल्ली से ग्वालियर के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी इस गांजे की सप्लाई की जा रही थी।
मामले की जांच उस समय आगे बढ़ी जब ग्वालियर की पड़ाव थाना पुलिस ने 8 अगस्त 2026 को मोती महल कोषालय के पास एक खंडहर से स्थानीय तस्कर सूरज को 2 किलो 800 ग्राम OG गांजे के साथ पकड़ा। पूछताछ के दौरान सूरज से दिल्ली में मौजूद सप्लायर प्रिंस के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए एक विशेष टीम दिल्ली भेजी। एसआई दिनेश तोमर के नेतृत्व में टीम ने पालम इलाके में करीब 48 घंटे तक ऑपरेशन चलाया और आखिरकार प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में प्रिंस ने बताया कि दिल्ली में उसके गिरोह के 5 अन्य सदस्य भी सक्रिय हैं। ये लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में OG गांजे की सप्लाई करते हैं। प्रिंस की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के बाकी सदस्य फरार हो गए हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। गिरफ्तार आरोपी नई दिल्ली के उत्तम नगर वेस्ट का रहने वाला बताया गया है, जबकि उसका मूल संबंध उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर से बताया गया है।
ग्वालियर के एएसपी निरंजन शर्मा के मुताबिक, गिरफ्तार किया गया आरोपी दिल्ली से स्थानीय सप्लायरों को OG गांजा उपलब्ध कराता था। फिलहाल उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क कितने शहरों तक फैला हुआ है, इसके अन्य सदस्य कौन हैं और अब तक कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ की सप्लाई की जा चुकी है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ के बाद गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सकेगा।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर सामान्य परिवहन माध्यमों की तुलना में फ्लाइट का इस्तेमाल कर रहा था। इसका उद्देश्य पुलिस की निगरानी से बचते हुए अलग-अलग शहरों तक खेप पहुंचाना बताया जा रहा है। इस तरह के नेटवर्क का सामने आना इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि नशीले पदार्थों की तस्करी अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अलग-अलग राज्यों और शहरों के बीच संगठित तरीके से की जा रही है।
OG गांजे को लेकर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इसे हाइड्रोपोनिक तकनीक से तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में मिट्टी के बजाय पानी और पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है। अधिक कीमत और कथित तौर पर अधिक नशीले प्रभाव के कारण इसकी मांग बढ़ने की बात भी सामने आई है।
ग्वालियर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा दिल्ली तक पहुंच गया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार बताए जा रहे गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ना और इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे स्थानीय सप्लायरों की पहचान करना है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फ्लाइट के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई का यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इस पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह पुलिस से बचने के लिए लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्वालियर पुलिस की कार्रवाई में पहले स्थानीय स्तर पर खेप के साथ एक आरोपी पकड़ा गया और उसी से मिले सुराग के आधार पर दिल्ली में बैठे सप्लायर तक पहुंच बनाई गई। अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर इस पूरे नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।



