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दिल्ली-NCR में H1N1 का खतरा बढ़ा

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दिल्ली-NCR में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। 2026 में अब तक दिल्ली में H1N1 संक्रमण के 1,777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या सिर्फ 229 थी। बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय रहते डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

डॉक्टर के मुताबिक H1N1 इन्फ्लुएंजा-A वायरस का एक प्रकार है, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल संक्रमण जैसे ही होते हैं, इसलिए कई बार लोग इसे मामूली बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।

हालांकि ज्यादातर लोगों में संक्रमण के लक्षण हल्के रह सकते हैं, लेकिन कुछ समूहों में इसके गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। 0 से 5 साल तक के छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि इस उम्र में इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। वहीं 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी संक्रमण की जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

गर्भवती महिलाओं को भी H1N1 को लेकर विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले शारीरिक और हार्मोनल बदलावों के कारण संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसके अलावा डायबिटीज, अस्थमा, COPD और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में H1N1 के कारण निमोनिया और सांस से जुड़ी गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ सकता है।

जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें भी संक्रमण से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। कैंसर, किडनी की बीमारी या ऐसी अन्य स्थितियों से जूझ रहे लोगों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसे लोगों को फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

H1N1 से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना, हाथों को नियमित रूप से साबुन से साफ करना और खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना जरूरी बताया गया है। बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

दिल्ली-NCR में मामलों में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर तेज बुखार, लगातार खांसी, अत्यधिक कमजोरी या सांस से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें हल्के में लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

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