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मिडिल ईस्ट में फिर भड़का संकट

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मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान, इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चलाए जा रहे युद्धविराम और शांति वार्ता प्रयासों को भी बड़ा झटका लगा है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत को फिलहाल रोकने का ऐलान कर दिया है। तेहरान का आरोप है कि लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई लगातार बढ़ रही है और ऐसे माहौल में किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है।

ईरान की सरकारी और अर्धसरकारी एजेंसियों के अनुसार, देश की नेतृत्व टीम ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को भेजे जा रहे संदेशों और बातचीत की प्रक्रिया को निलंबित कर दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक इजरायल लेबनान और गाजा में अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तब तक किसी व्यापक समझौते या युद्धविराम पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिए हैं कि यदि एक मोर्चे पर संघर्ष जारी रहता है तो पूरे क्षेत्र में युद्धविराम की अवधारणा कमजोर पड़ जाएगी।

दरअसल, हाल के दिनों में इजरायल ने दक्षिणी बेरूत और लेबनान के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इजरायल का दावा है कि उसका निशाना हिज्बुल्लाह के ठिकाने हैं, जबकि लेबनान और ईरान इन हमलों को क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बता रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों के बाद हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं और हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। यही वजह है कि पहले से चल रही युद्धविराम वार्ताएं अब संकट में पड़ गई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच दुनिया की नजर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी हुई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान समर्थित समूहों और अधिकारियों की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि क्षेत्रीय हालात नहीं सुधरे तो हॉर्मुज मार्ग पर दबाव और बढ़ाया जा सकता है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान और उसके सहयोगी रणनीतिक समुद्री मार्गों पर सख्त कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर दिखाई देने लगा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उनकी पहल से क्षेत्र में युद्धविराम की संभावना बनी हुई है। हालांकि ईरान की ओर से बातचीत रोकने के फैसले ने उनकी कूटनीतिक रणनीति को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप प्रशासन पहले भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और क्षेत्रीय संघर्ष कम करने के लिए कई प्रयास कर चुका है, लेकिन लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई ने इन कोशिशों को कमजोर कर दिया है।

उधर लेबनान की ओर से भी शांति की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कुछ वरिष्ठ लेबनानी नेताओं ने अमेरिका को संकेत दिए हैं कि हिज्बुल्लाह व्यापक और स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन इसके लिए इजरायल को भी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में अभी भी कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं, हालांकि हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल ईरान, इजरायल और लेबनान तक सीमित नहीं है। यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। भारत सहित कई एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं, इसलिए इस संघर्ष पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

फिलहाल मिडिल ईस्ट में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है, दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच संवाद रुक गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्षेत्र युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर एक बड़े और व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ता है।

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