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मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा

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मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ लेता नजर आ रहा है। ईरान ने अपने गैस ठिकानों पर हुए हमलों के बाद सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह इन देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है। ईरान के सरकारी मीडिया के जरिए जारी इस चेतावनी में साफ कहा गया है कि तेल रिफाइनरी, गैस फील्ड और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स अब संभावित हमलों के दायरे में हैं।

जानकारी के मुताबिक, ईरान ने खास तौर पर सऊदी अरब की SAMREF रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, UAE के अल-होसन गैस फील्ड और कतर के रास लाफान तथा मेसाइद जैसे बड़े ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और कई जगहों पर एहतियातन इन ऊर्जा प्रतिष्ठानों को खाली कराया जा रहा है।

दरअसल, यह तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान के सबसे बड़े साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला हुआ, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ और आग लग गई। इस हमले के लिए ईरान ने इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि अब दुश्मनों के साथ-साथ उनके सहयोगी देशों के आर्थिक और ऊर्जा ठिकाने भी निशाने पर होंगे।

ईरान की इस धमकी का असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमला होता है, तो इससे दुनिया की तेल और गैस सप्लाई पर भारी असर पड़ेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी ने न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि यह तनाव और कितना बढ़ता है और क्या इसका असर वैश्विक ऊर्जा संकट में बदलता है।

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