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जंतर-मंतर मारपीट कांड में कपिल मिश्रा का नाम क्यों आया?

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक मारपीट के मामले ने अब सियासी रंग ले लिया है। प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के घायल होने और कथित आरोपी के एक वीडियो में राजनीतिक पहुंच का दावा करने के बाद दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में आरोपी बताए जा रहे शख्स ने दावा किया कि एक राजनीतिक नेता के फोन के बाद उसे जेल नहीं जाना पड़ा। इसी दावे के बाद दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा का नाम विवाद में आया है और मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालांकि, पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है।

मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में गाजियाबाद निवासी 38 वर्षीय संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इसके बाद उनकी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पुलिस का कहना है कि कानून के मुताबिक आगे चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

विवाद तब बढ़ा जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर यह दावा करते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया था और एक राजनीतिक व्यक्ति के हस्तक्षेप के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। वीडियो में उन्होंने चोट को बेहद गंभीर बताते हुए दावा किया कि पीड़ित को कई टांके आए थे। इसी दावे को लेकर विपक्षी नेताओं ने दिल्ली सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।

वीडियो में राजनीतिक पहुंच का जो दावा किया गया, उसे लेकर कपिल मिश्रा का नाम सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिला। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या हस्तक्षेप का कोई प्रमाण नहीं मिला है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

पुलिस ने वायरल वीडियो में किए गए गंभीर चोट के दावे पर भी स्पष्टीकरण दिया है। पुलिस के अनुसार घायल व्यक्ति की चोट उतनी गंभीर नहीं थी, जितना वीडियो में दावा किया गया। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कहा कि सिर की चोट किसी हथियार से नहीं, बल्कि हाथ में पहने गए धातु के कड़े से लगी थी। पुलिस ने यह भी कहा कि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के आधार पर मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की गई।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक मामले में शिकायत मिलने के बाद जांच की गई और आरोपियों से पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि किसी आरोपी को केवल राजनीतिक दबाव के कारण छोड़े जाने की बात सही नहीं है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जांच अभी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

इस मामले ने इसलिए भी राजनीतिक तूल पकड़ लिया है क्योंकि जंतर-मंतर देश की राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख स्थल है। यहां होने वाले प्रदर्शनों में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न आंदोलनों से जुड़े लोग शामिल होते हैं। ऐसे स्थान पर प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा या किसी व्यक्ति के घायल होने की घटना सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई दोनों पर सवाल खड़े करती है।

मामले में सामने आए वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई। एक पक्ष आरोपी के कथित बयान को पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने का आधार बना रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल दावों के आधार पर घटना की गंभीरता तय नहीं की जा सकती। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट और दर्ज शिकायत को जांच का आधार बताया है।

विवाद के बीच आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से बाद में अपने बयान को लेकर सफाई भी सामने आई। उन्होंने कथित रूप से कहा कि घटना के दौरान उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हुआ था और उन्होंने जो किया, वह आत्मरक्षा में किया। यानी घटना को लेकर आरोपी और पुलिस के संस्करण में भी अंतर दिखाई दे रहा है।

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जंतर-मंतर पर वास्तव में झड़प के दौरान क्या हुआ था और आरोपी द्वारा राजनीतिक हस्तक्षेप का किया गया दावा कितना सही है। फिलहाल पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोपों को नकार दिया है और जांच को कानून के मुताबिक आगे बढ़ाने की बात कही है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत के सामने साक्ष्य आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाओं पर पुलिस की कार्रवाई कितनी पारदर्शी होनी चाहिए और सोशल मीडिया पर सामने आने वाले दावों की जांच किस तरह की जानी चाहिए। फिलहाल दिल्ली पुलिस के सामने चुनौती यही है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने रखे और यह स्पष्ट करे कि आरोपी को किसी राजनीतिक प्रभाव के कारण राहत मिली थी या फिर उसके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत थी।

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