
कर्नाटक विधानसभा ने VB-G RAM G कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया
कर्नाटक विधानसभा ने बुधवार केंद्र सरकार द्वारा पारित VB-G RAM G कानून के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक कदम के तहत एक मजबूत प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र से मनरेगा (MGNREGA) को उसकी मूल रूप में पुनः लागू करने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धरामैया द्वारा मंगलवार को सदन में पेश किया गया था और बुधवार को सदन द्वारा मंजूर कर लिया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि VB-G RAM G कानून संघीय सिद्धांतों, ग्राम पंचायतों के अधिकारों और ग्रामीण लोगों के आजीविका के अधिकार के खिलाफ है इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और MGNREGA को फिर से लागू किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि केंद्र ने बिना राज्यों से विस्तृत चर्चा किए VB-G RAM G को एकतरफा लागू किया, जिसने MGNREGA की मांग-आधारित रोजगार गारंटी की भावना को कमजोर किया। MGNREGA को ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर रोजगार, आजीविका और गरीब वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने वाला कार्यक्रम बताया गया है, जिसे हटाना सदन गंभीर रूप से देखता है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि नई VB-G RAM G योजना जहां ग्रामीण विकास के अधिकार और पंचायतों की भूमिका को कम करती है, वहीं राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाती है।
विपक्षी भाजपा और उसकी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (एस) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और वॉकआउट किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव केवल कांग्रेस पार्टी की मांग का प्रतिनिधित्व करता है न कि पूरे सदन का, और उन्होंने MGNREGA का समर्थन जताया। विपक्ष ने साथ ही राज्य के आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी आरोप लगाए तथा मंत्री आरबी तिम्मापुर के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने विपक्ष की इन मांगों को ठुकराते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने प्रस्ताव में जोर देकर कहा कि VB-G RAM G कानून संघीय ढांचे की नींव, ग्रामीण आजीविका के अधिकार और पंचायतों के विकेन्द्रीकरण के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि MGNREGA ने ग्रामीण भारत में संबंधित बुनियादी ढांचे, स्थानीय संपत्तियों और दीर्घकालिक आजीविका के सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए सदन ने केंद्र से अनुरोध किया कि यह कदम वापस लें और MGNREGA को उसकी पुरानी, अधिकार-आधारित संरचना के साथ पुनर्जीवित करें।
इस राजनीतिक संघर्ष ने राज्य और केंद्र के बीच नीति, रोजगार गारंटी व वित्तीय बंटवारे जैसे मुद्दों पर बड़े सवाल उठाए हैं, जिनके बारे में आगामी दिनों में और चर्चा होने की संभावना है।



