
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडितों को 15 दिनों के भीतर दूसरी बार धमकी मिलने की खबर सामने आई है। कथित धमकी में उन्हें चेतावनी देते हुए कहा गया है कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इससे घाटी में काम कर रहे अल्पसंख्यक कर्मचारियों के बीच सुरक्षा को लेकर डर और चिंता का माहौल बन गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले अगस्त की शुरुआत में एक धमकी पत्र ऑनलाइन सामने आया था, जिसमें कश्मीर घाटी में काम करने वाले कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी कथित तौर पर साझा की गई थी। इस पत्र की प्रामाणिकता की पुलिस जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि धमकी देने वाले समूह का संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े किसी फ्रंट संगठन से हो सकता है, हालांकि इस संबंध की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहली धमकी के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी थी। कई कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई थी। अधिकारियों ने विशेष रूप से उन कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जिनके नाम कथित धमकी पत्र में शामिल थे।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि धमकी में कथित तौर पर उन कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है जो सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं। पहले सामने आए पत्र में कुछ कर्मचारियों को सरकार की ओर से आतंकियों की संपत्तियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से जोड़ने की कोशिश की गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी के पीछे वास्तव में कौन लोग हैं और ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे संदेशों की विश्वसनीयता कितनी है।
इस बीच जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों पर चिंता जताई थी और केंद्रीय गृह मंत्रालय से मामले की जांच की मांग की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब घाटी में अलग-अलग समुदायों के लोग काम कर रहे हैं तो कश्मीरी पंडितों को विशेष रूप से निशाना क्यों बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा था कि ऐसी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और इनके पीछे मौजूद लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सुरक्षा एजेंसियां इन धमकी पत्रों की वास्तविकता और इनके पीछे सक्रिय नेटवर्क की जांच कर रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडितों और अन्य अल्पसंख्यक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लगातार सामने आ रही धमकियों ने एक बार फिर घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े संभावित नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



