Advertisement
उत्तर प्रदेशकानपुरलाइव अपडेट
Trending

किडनी रैकेट का बड़ा खुलासा

Advertisement
Advertisement

उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आए अवैध किडनी रैकेट ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर दिया है। इस मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार मेरठ और दिल्ली तक फैले हुए थे। जांच में सामने आया है कि मेरठ के अल्फा अस्पताल में किडनी डोनर और मरीजों की जांच की जाती थी, जबकि असली ट्रांसप्लांट दिल्ली के दो बड़े अस्पतालों में अवैध तरीके से किए जाते थे।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर डोनर बनाया जाता था, फिर उनकी मेडिकल जांच मेरठ में करवाई जाती थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली भेजा जाता था, जहां गैर-अधिकृत अस्पतालों में सर्जरी कर दी जाती थी। हैरानी की बात यह है कि ये अस्पताल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अधिकृत नहीं थे, फिर भी वहां ऑपरेशन किए जा रहे थे।

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि इस रैकेट में कई डॉक्टर, दलाल और अस्पताल संचालक शामिल थे, जो एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे। सर्जरी के बाद मरीजों और डोनरों को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाता था, ताकि सबूत न मिल सकें। इस पूरे खेल को छिपाने के लिए रिकॉर्ड्स में भी हेरफेर की जाती थी।

इस मामले में मेरठ के अल्फा अस्पताल का नाम सामने आने के बाद वहां हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पताल का आधा स्टाफ फरार हो गया है और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। कई डॉक्टरों को नामजद किया गया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह रैकेट पिछले कई वर्षों से सक्रिय था और दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में फैला हुआ था। दलालों के जरिए डोनर और मरीजों की व्यवस्था की जाती थी और लाखों रुपये लेकर अवैध ट्रांसप्लांट किए जाते थे। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब एक छोटे से विवाद के बाद पुलिस को सुराग मिला और धीरे-धीरे पूरे सिंडिकेट की परतें खुलती चली गईं।

फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मिलकर पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं। कई जगहों पर छापेमारी जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि चिकित्सा क्षेत्र की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share