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महाराष्ट्र में मुस्लिम वोटिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव, कांग्रेस की परंपरागत पकड़ कमजोर

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महाराष्ट्र के निकाय चुनावों (Municipal Elections 2026) में मुस्लिम समुदाय के मतदान के तरीकों में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से जहाँ मुस्लिम वोट महाविकास आघाड़ी (Congress-NCP) और कांग्रेस के पक्ष में स्वयं को सहारा माना जाता था, अब ओवैसी की पार्टी AIMIM और नई स्थानीय पार्टी ‘ISLAM’ को अधिक समर्थन मिल रहा है। यह बदलाव इस समुदाय की राजनीतिक प्राथमिकताओं में एक नया रुझान प्रदर्शित करता है।

इन चुनावों में एआईएमआईएम (All India Majlis-e-Ittehad-ul-Muslimeen) ने महाराष्ट्र के कई नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन किया है, जैसे छत्रपति संभाजीनगर, मालेगांव, अमरावती, धुले और मुंबई के कुछ इलाकों में जीत दर्ज की। वहीं, ‘ISLAM’ पार्टी ने विशेष रूप से मालेगांव नगर निगम में 35 सीटें जीतकर कांग्रेस के पुराने प्रभुत्व को चुनौती दी है। कांग्रेस को यहाँ केवल 3 सीटें मिल पाईं, जो उसकी परंपरागत पकड़ में गिरावट का संकेत है।

विश्लेषकों के अनुसार, मुस्लिम मतदाताओं का यह बदलता रुझान इस वजह से है कि वे अब सामुदायिक मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व को अधिक महत्त्व दे रहे हैं, बजाय पारंपरिक गठबंधनों पर भरोसा जताने के। कई मतदाताओं ने महसूस किया है कि कांग्रेस-एनसीपी जैसे ‘सेक्युलर’ दल अब उनकी प्राथमिकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं और इसलिए उन्होंने AIMIM और ISLAM पार्टी को मतदान में प्राथमिकता दी।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस समर्थन को धार्मिक आधार पर वोटिंग का मुद्दा कहना खारिज किया है और कहा है कि यह बदलाव राजनीतिक पहचान और सेवा-आधारित प्रदर्शन की वजह से है, न कि केवल धर्म के कारण।

इस बदलाव का असर कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पार्टी महाराष्ट्र में मुस्लिम वोट बैंक पर अब नए प्रतिद्वंद्वियों से टक्कर देख रही है, जो आने वाले चुनावों में राज्य की राजनीतिक तस्वीर को और प्रभावित कर सकता है।

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