
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका और शिक्षाविद् मंगला कपूर को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया। यह सम्मान केवल उनकी कला और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की उस अद्भुत यात्रा का भी सम्मान है, जिसने उन्हें लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। मंगला कपूर का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी किसी व्यक्ति के सपनों और हौसलों को पराजित नहीं कर सकतीं।
मंगला कपूर की कहानी बचपन में हुए एक भयावह एसिड अटैक से शुरू होती है। जब वह महज 12 वर्ष की थीं, तब एक हमले ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस घटना में उनका चेहरा गंभीर रूप से झुलस गया और उन्हें वर्षों तक दर्द, सामाजिक चुनौतियों और मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि इस हमले के बाद उन्हें दर्जनों सर्जरी करानी पड़ीं और लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा तथा संगीत को अपनी ताकत बना लिया।
वाराणसी की रहने वाली मंगला कपूर ने अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए शास्त्रीय संगीत का सहारा लिया। संगीत उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और पुनर्निर्माण का माध्यम बन गया। अपनी मधुर गायकी और समर्पण के कारण उन्हें “काशी की लता” के नाम से पहचान मिली। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। बाद में वह प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में प्रोफेसर बनीं और अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद मंगला कपूर की उपलब्धि को देशभर में सराहा जा रहा है। सामाजिक संगठनों, कलाकारों और शिक्षाविदों ने इसे उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा बताया है जो जीवन में किसी बड़ी विपत्ति का सामना कर चुके हैं। उनका मानना है कि मंगला कपूर ने साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियां व्यक्ति की प्रतिभा और संकल्प को सीमित नहीं कर सकतीं।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई विशिष्ट व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में मंगला कपूर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके दशकों लंबे कार्य, संगीत साधना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मंगला कपूर की यात्रा केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक स्वीकृति और आत्मबल का भी प्रतीक है। उन्होंने यह दिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे तो वह समाज में सम्मान और पहचान दोनों हासिल कर सकता है। आज उनका नाम उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल हो गया है जिन्होंने अपने संघर्ष को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया।
मंगला कपूर की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का संदेश है। एसिड अटैक जैसी दर्दनाक घटना से उबरकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक प्राप्त करना उनके अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और कला के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उनकी कहानी बताती है कि जीवन में आने वाली मुश्किलें सफलता की राह को रोक नहीं सकतीं, यदि इंसान के भीतर आगे बढ़ने का जुनून और विश्वास कायम रहे।



