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ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी ड्रोन डील

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भारत ने समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए अमेरिका की रक्षा कंपनी General Atomics Aeronautical Systems Inc. के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके तहत भारतीय नौसेना 2 MQ-9B Sea Guardian हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस यानी लंबे समय तक ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ड्रोन 30 महीने के लिए लीज पर लेगी। इस करार की कुल कीमत करीब ₹1,943 करोड़ बताई गई है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध और समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये MQ-9B Sea Guardian ड्रोन भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और टोही क्षमता को मजबूत करेंगे। इनमें आधुनिक सेंसर और अन्य उन्नत उपकरण लगे होंगे, जिनकी मदद से समुद्र के विशाल क्षेत्रों पर लंबे समय तक नजर रखी जा सकेगी। इनका मुख्य उपयोग Intelligence, Surveillance and Reconnaissance यानी खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही मिशनों के लिए किया जाएगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी असामान्य गतिविधि पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।

यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच पहले से हुए बड़े MQ-9B ड्रोन समझौते से अलग है। भारत ने अक्टूबर 2024 में General Atomics के साथ 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने के लिए लगभग 3 अरब डॉलर का करार किया था। इस बड़े समझौते के तहत भारतीय नौसेना को 15 Sea Guardian ड्रोन मिलने हैं, जबकि भारतीय सेना और वायुसेना को 8-8 SkyGuardian ड्रोन दिए जाने हैं। हालांकि इनकी डिलीवरी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, इसलिए 2 अतिरिक्त Sea Guardian ड्रोन को लीज पर लेने का फैसला भारतीय नौसेना की तत्काल निगरानी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Sea Guardian और SkyGuardian दोनों MQ-9B परिवार के ड्रोन हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएं अलग हैं। Sea Guardian को विशेष रूप से समुद्री निगरानी और समुद्री मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि SkyGuardian का इस्तेमाल जमीन और अन्य निगरानी अभियानों में किया जा सकता है। भारतीय नौसेना के लिए Sea Guardian इसलिए खास है क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को बेहद बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी करनी होती है।

भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख समुद्री मार्ग गुजरते हैं और यहां कई देशों की नौसैनिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी, पश्चिम एशिया में तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। ऐसे में लंबे समय तक हवा में रहकर दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों की निगरानी करने वाले ड्रोन नौसेना की क्षमता को काफी मजबूत कर सकते हैं।

ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति ने भी समुद्री सुरक्षा की अहमियत बढ़ा दी है। इस तरह के तनाव का असर समुद्री व्यापार मार्गों, जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस नए लीज समझौते को सीधे किसी एक युद्ध या संघर्ष से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब हिंद महासागर और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में निगरानी की जरूरत पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत पहले भी अमेरिकी कंपनी से Sea Guardian ड्रोन लीज पर लेकर उनका इस्तेमाल कर चुका है। भारतीय नौसेना ने पहले 2 MQ-9B Sea Guardian ड्रोन को समुद्री निगरानी के लिए लीज पर लिया था और उनके लीज समझौते को बाद में बढ़ाया भी गया। इससे नौसेना को इन हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन के संचालन का अनुभव पहले से है।

नए समझौते के बाद भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता में और मजबूती आने की उम्मीद है। ये ड्रोन लंबे समय तक उड़ान भरते हुए विशाल समुद्री इलाकों में लगातार जानकारी जुटा सकते हैं। पारंपरिक निगरानी विमानों की तुलना में ऐसे ड्रोन लंबे मिशन के दौरान महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने में मददगार होते हैं।

इस डील का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग भी है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, सैन्य उपकरण और संयुक्त सहयोग में लगातार विस्तार हुआ है। 31 MQ-9B ड्रोन की खरीद के बाद अब 2 अतिरिक्त Sea Guardian ड्रोन को लीज पर लेने का समझौता यह दिखाता है कि भारत आधुनिक मानव रहित विमान प्रणालियों को अपनी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है।

कुल मिलाकर, ₹1,943 करोड़ की इस डील के तहत भारत 30 महीने के लिए अमेरिका से 2 MQ-9B Sea Guardian ड्रोन लीज पर लेगा। इनका इस्तेमाल भारतीय नौसेना समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और टोही अभियानों के लिए करेगी। ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुए इस समझौते को भारत की समुद्री सुरक्षा तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह भारत की उस व्यापक योजना का हिस्सा भी है, जिसके तहत आने वाले समय में 31 MQ-9B ड्रोन भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करेंगे।

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