
महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के मुलुंड (पश्चिम) इलाके में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा हुआ जब निर्माणाधीन मेट्रो पिलर का सीमेंट का हिस्सा अचानक गिर गया और नीचे से गुजर रही ऑटो-रिक्शा और एक कार पर जा टकराया, जिससे कम-से-कम 3-4 लोग घायल हो गए हैं। यह हादसा एलबीएस रोड, जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के पास लगभग 12:20 बजे दोपहर में हुआ, जब चालू मेट्रो लाइन-4 की एक बनती-बनी संरचना का भाग अचानक टूटकर नीचे गिरा।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिलर का यह हिस्सा अचानक ऑटो-रिक्शा के ऊपर गिरा, जिससे तीन से चार लोग घायल होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कार को भी हल्का नुकसान हुआ है। हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, लोकल पुलिस, मेट्रो प्राधिकरण के कर्मचारी, वार्ड स्टाफ और 108 एंबुलेंस सेवाएं मौके पर पहुंचीं और घायल यात्रियों को तुरंत इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में पहुंचाया गया।
घटना की वजह से इलाके में अचानक अफरातफरी मच गई और एलबीएस रोड पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। पुलिस और मेट्रो प्राधिकरण के अधिकारी अब दुर्घटना के कारणों की गंभीरता से जांच कर रहे हैं, तथा यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि निर्माण सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन किया जा रहा था या नहीं, और क्या निर्माण कार्य में कोई तकनीकी या संरचनात्मक दोष रहा।
मेट्रो के निर्माण स्थल पर गिरने वाले भारी सीमेंट स्लैब ने न केवल ऑटो को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया बल्कि आसपास के अन्य वाहनों और राहगीरों के लिए भी खतरे की स्थिति पैदा की। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने बताया कि यह हादसा अचानक हुआ और आसपास के लोग अचानक चक्करों में फंस गए। कई लोगों ने इस हादसे के व्हिडियो और तस्वीरें भी मोबाइल पर रिकॉर्ड कीं जो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा हो रही हैं।
स्थानीय प्रशासन और मुंबई मेट्रो प्राधिकरण (MMRDA) को भी इस घटना की गंभीरता का आभास है। उन्होंने राहत-बचाव और सुरक्षा उपायों को तेज़ कर दिया है। हालांकि घायल यात्रियों की चोटों की गंभीरता को लेकर आधिकारिक विवरण अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें निगरानी में रखा गया है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मुंबई मेट्रो परियोजना के कई हिस्सों में निर्माण सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठे हैं, और स्थानीय नागरिकों ने निर्माण स्थलों के पास यात्रियों तथा वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यातायात के नीचे बन रहे पिलरों के पास जरूरी सुरक्षा बैरिकेड्स और चेतावनी संकेत पर्याप्त रूप से नहीं लगाए गए थे, जिससे यह हादसा संभव हुआ है।



