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‘यदि जरूरत पड़ी तो काबुल और कंधार को भी ध्वस्त करने से नहीं हिचकेंगे’

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पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर मौजूदा तनाव के बीच Pakistan-Afghanistan tensions, airstrike controversy और रणनीतिक बयान महत्वपूर्ण बहस का विषय बन रहे हैं। पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक के बाद, पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सुरक्षा विशेषज्ञ Dr Qamar Cheema ने विवादित बयान देते हुए कहा कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो “काबुल को गिराना पड़ा तो हम हिचकेंगे नहीं, कंधार को तबाह करना पड़ा तो भी नहीं” — यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच संबंधों पर चिंता बढ़ा रही है।

चीमा ने कहा कि पाकिस्तान अब सीमावर्ती इलाके में बढ़ते militant activity threats के कारण तालिबान शासन को बर्दाश्त नहीं कर सकता और अगर उन्हें काबुल या कंधार जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाना पड़ा, तो वह पीछे नहीं हटेंगे। उनका तर्क था कि पाकिस्तान एक nuclear-armed state और 25 करोड़ की जनसंख्या वाला देश है, जिसे अपनी सुरक्षा के लिए कठिन कदम उठाना पड़ेगा।

हाल के दिनों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिका और अन्य सीमावर्ती प्रांतों में airstrikes किए हैं, जिनमें उसने Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP) और ISKP से जुड़े ठिकानों को निशाना बताया। पाकिस्तान का यह दावा रहा है कि इन हमलों में सैंकड़ों आतंकवादियों को मार गिराया गया, जबकि अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान प्रशासन ने इन हमलों को नागरिकों के खिलाफ “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया है और पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है।

अंतरराष्ट्रीय निगरानी समूहों और संयुक्त राष्ट्र के हवाले से भी कहा गया है कि इन हवाई हमलों में आम नागरिक, महिलाएं और बच्चे भी प्रभावित हुए हैं और कई लोग मारे या घायल हुए हैं; इससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव regional security के लिहाज से और बढ़ रहा है।

चीमा और पाकिस्तान की निष्पक्षता पर आलोचनाएँ भी हो रही हैं कि इन्हें diplomacy and restraint के बजाय ऐसे हमलों को बढ़ावा देना बताया जा रहा है जो क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल सकते हैं।

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