Advertisement
लाइव अपडेटविश्व
Trending

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

Advertisement
Advertisement

जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का सबसे ज्यादा असर तेल आपूर्ति पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर घरेलू पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है। हाल ही में 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 2.5 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी की गई थी, जिसे पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक माना जा रहा है। इसके बाद से ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास बनी हुई हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है, जबकि डीजल भी 95 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है। मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। कई शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे निजी वाहन चालकों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और छोटे कारोबारियों की लागत लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर और दबाव बन सकता है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट भी दर्ज की गई है, लेकिन उसका लाभ अभी तक उपभोक्ताओं को नहीं मिला है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जब वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें नीचे आ रही हैं तो घरेलू स्तर पर भी पेट्रोल और डीजल सस्ता किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि महंगे ईंधन के कारण माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। भारत दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग हब में से एक है और देश की रिफाइनरियां घरेलू जरूरतों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करती हैं। सरकार का कहना है कि आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर कीमतों पर पड़ सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि रुपये-डॉलर विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, रिफाइनिंग लागत और परिवहन खर्च भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत में ईंधन पर लगने वाले टैक्स खुदरा कीमत का बड़ा हिस्सा होते हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को तुरंत राहत नहीं मिल पाती।

फिलहाल आम जनता की नजरें पश्चिम एशिया की स्थिति और सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं। यदि ईरान-अमेरिका तनाव कम होता है और वैश्विक तेल बाजार स्थिर रहता है तो भविष्य में कीमतों में राहत मिल सकती है। लेकिन मौजूदा हालात में पेट्रोल और डीजल के ऊंचे दाम देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share