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पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का संदेश

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पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को लेकर लोगों को घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और हर परिस्थिति में देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन भारत सरकार हर स्थिति में “इंडिया फर्स्ट” की नीति के साथ काम करती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों को फैलाने से बचें। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भारत एक मजबूत राष्ट्र है और देश किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत में भी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं, जिसके चलते कुछ जगहों पर लोगों ने घबराकर ईंधन की ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी। कई राज्यों में पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें भी देखने को मिलीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ऐसे हालात से निपटने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है। उन्होंने मंत्रियों और संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि देश में आम उपभोक्ताओं पर किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े और ईंधन तथा जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सामान्य बनी रहे। सरकार ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार समीक्षा कर रही है।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की और तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार और परिवारवाद की राजनीति हावी है और जनता अब बदलाव चाहती है। पीएम मोदी ने दावा किया कि तमिलनाडु में लोगों के बीच परिवर्तन की इच्छा तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए हालात पर सतर्क नजर रखना जरूरी है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं और लोगों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

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