
लोकसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने डोकलाम और भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला, जिससे संसद में और उसके बाहर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। राहुल गांधी ने संसद की कार्यवाही के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का उल्लेख करते हुए चीन-भारत 2020 के डोकलाम विवाद पर सवाल उठाए, लेकिन सत्ता पक्ष ने उनके बयान को विवादित बताते हुए हंगामा और सदन की कार्रवाई को स्थगित कर दिया। बाद में संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि डोकलाम में चीनी टैंकों के भारतीय सीमा के निकट आने जैसे गंभीर मसलों पर संसद में खुलकर बात करने का उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही बात है जो आर्मी चीफ नरवणे ने अपनी किताब में लिखी है, लेकिन सरकार उसे प्रकाशित होने से रोक रही है और संसद में बोलने नहीं दे रही है। राहुल गांधी का आरोप था कि प्रधानमंत्री और उनके नेतृत्व वाली सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर पारदर्शिता नहीं रखती और विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है।
संसद में चर्चा के दौरान जैसे ही राहुल गांधी ने अप्रकाशित किताब के हवाले से चीन-भारत सीमा विवाद पर टिप्पणियाँ शुरू कीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बिना प्रकाशित और प्रमाणित स्रोत से उद्धरण देना नियमों के खिलाफ है और इससे सदन की गरिमा को भी नुकसान हो सकता है। इस बहस में सदन में काफी हंगामा हुआ और अंततः लोकसभा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चीन मुद्दे पर सच उजागर नहीं होने देना चाहती है और इसलिए उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को यह जानना चाहिए कि क्या वास्तव में डोकलाम और सीमा विवाद में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई जा रही है और देश की सुरक्षा को लेकर क्या निर्णय लिए गए थे। कांग्रेस ने बाद में भी आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार नियमों का गलत इस्तेमाल कर विपक्ष की आवाज़ को दबा रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद की आज़ादी और सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है। डोकलाम जैसे संवेदनशील विषय पर संसद में हुई यह तीखी बहस और उसके बाद बाहर राहुल गांधी का बयान आगे की राजनीतिक लड़ाई को और उग्र कर सकता है।



