
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच Form 6 को लेकर विवाद और गहरा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर Form 6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया है। यह मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और अदालत रिकॉर्ड देखकर यह जानना चाहती है कि आखिर इस फॉर्म में बदलाव किसने किया। राहुल गांधी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए Form 6 में बदलाव किया और इससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आई टिप्पणी को अपने आरोपों के समर्थन के तौर पर पेश किया। हालांकि, राहुल गांधी का यह आरोप राजनीतिक बयान है और इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। विवाद की जड़ Form 6 में जोड़े गए एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र से जुड़ी है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। SIR के दौरान ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनका नाम या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में मौजूद था या नहीं। कुछ मामलों में आवेदक से संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ और क्रम संख्या की जानकारी भी मांगी गई। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। CJI ने कहा कि जब रिकॉर्ड अदालत के सामने आएगा तो यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किया। कोर्ट की यह टिप्पणी उस दावे के संदर्भ में आई, जिसमें Form 6 के अतिरिक्त हिस्से को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। दरअसल, चुनाव आयोग का कहना है कि Form 6 को मूल रूप से बदला नहीं गया था, बल्कि SIR की प्रक्रिया के लिए इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग ने पहले कहा था कि SIR से जुड़ी यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के बिहार SIR संबंधी फैसले में बरकरार रखी गई थी। आयोग के मुताबिक गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म का ही इस्तेमाल किया जाएगा। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को भी खारिज किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था। आयोग ने राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बताते हुए Form 6 और SIR से जुड़े अपने पुराने स्पष्टीकरण का भी हवाला दिया। आयोग के अनुसार SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र उन राज्यों में ऑनलाइन प्रक्रिया से हटा दिया गया है, जहां SIR पूरा हो चुका है। वहीं जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया जारी है, वहां यह घोषणा अभी प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई है। आयोग का कहना है कि Form 6 खुद वैधानिक रूप से संशोधित नहीं किया गया है, बल्कि SIR के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज या घोषणा की व्यवस्था की गई थी। इस विवाद में चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में अतिरिक्त घोषणा शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। उनका तर्क बताया गया कि यदि वैधानिक फॉर्म में बदलाव करना है तो Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक संशोधन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनके खिलाफ कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार किया है। अदालत ने कहा कि संबंधित पक्षों का जवाब और रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही मामले पर आगे विचार किया जाएगा। यानी अभी अदालत ने यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि Form 6 में बदलाव गैरकानूनी तरीके से किया गया था। Form 6 विवाद ने SIR को लेकर पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। एक तरफ राहुल गांधी और विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों और SIR की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने रिकॉर्ड पेश होने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि Form 6 में अतिरिक्त घोषणा किस प्रक्रिया के तहत जोड़ी गई और इसके लिए किस स्तर पर निर्णय लिया गया था।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच Form 6 को लेकर विवाद और गहरा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर Form 6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया है। यह मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और अदालत रिकॉर्ड देखकर यह जानना चाहती है कि आखिर इस फॉर्म में बदलाव किसने किया।
राहुल गांधी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए Form 6 में बदलाव किया और इससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आई टिप्पणी को अपने आरोपों के समर्थन के तौर पर पेश किया। हालांकि, राहुल गांधी का यह आरोप राजनीतिक बयान है और इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विवाद की जड़ Form 6 में जोड़े गए एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र से जुड़ी है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। SIR के दौरान ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनका नाम या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में मौजूद था या नहीं। कुछ मामलों में आवेदक से संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ और क्रम संख्या की जानकारी भी मांगी गई।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। CJI ने कहा कि जब रिकॉर्ड अदालत के सामने आएगा तो यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किया। कोर्ट की यह टिप्पणी उस दावे के संदर्भ में आई, जिसमें Form 6 के अतिरिक्त हिस्से को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
दरअसल, चुनाव आयोग का कहना है कि Form 6 को मूल रूप से बदला नहीं गया था, बल्कि SIR की प्रक्रिया के लिए इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग ने पहले कहा था कि SIR से जुड़ी यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के बिहार SIR संबंधी फैसले में बरकरार रखी गई थी। आयोग के मुताबिक गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को भी खारिज किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था। आयोग ने राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बताते हुए Form 6 और SIR से जुड़े अपने पुराने स्पष्टीकरण का भी हवाला दिया।
आयोग के अनुसार SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र उन राज्यों में ऑनलाइन प्रक्रिया से हटा दिया गया है, जहां SIR पूरा हो चुका है। वहीं जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया जारी है, वहां यह घोषणा अभी प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई है। आयोग का कहना है कि Form 6 खुद वैधानिक रूप से संशोधित नहीं किया गया है, बल्कि SIR के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज या घोषणा की व्यवस्था की गई थी।
इस विवाद में चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में अतिरिक्त घोषणा शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। उनका तर्क बताया गया कि यदि वैधानिक फॉर्म में बदलाव करना है तो Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक संशोधन होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनके खिलाफ कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार किया है। अदालत ने कहा कि संबंधित पक्षों का जवाब और रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही मामले पर आगे विचार किया जाएगा। यानी अभी अदालत ने यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि Form 6 में बदलाव गैरकानूनी तरीके से किया गया था।
Form 6 विवाद ने SIR को लेकर पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। एक तरफ राहुल गांधी और विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों और SIR की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने रिकॉर्ड पेश होने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि Form 6 में अतिरिक्त घोषणा किस प्रक्रिया के तहत जोड़ी गई और इसके लिए किस स्तर पर निर्णय लिया गया था।



