
राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट से झटका नहीं
सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर अदालत ने सुनवाई आगे बढ़ा दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है।
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। अदालत ने चुनाव आयोग को भी जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई में आयोग के जवाब और विपक्षी नेताओं की ओर से पेश किए जाने वाले तथ्यों पर विचार किया जाएगा।
राहुल गांधी और 12 अन्य विपक्षी नेताओं ने याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं के नाम उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने इस पूरी कवायद की न्यायिक जांच और संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
इस याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत समेत कई विपक्षी नेता शामिल हैं। इनके अलावा तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने भी याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित अन्य चुनाव आयुक्तों को पक्षकार बनाया गया है।
विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों के तरीके और चुनाव आयोग के आंतरिक निर्णयों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में संबंधित फाइलों, बैठकों के विवरण और निर्णयों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। ये आरोप फिलहाल याचिकाकर्ताओं के दावे हैं, जिन पर अदालत में विचार होना बाकी है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में SIR से जुड़े फैसलों को एकतरफा तरीके से लिए जाने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया से संबंधित निर्णय सभी तीन चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों पर भी अपना पक्ष रखा है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। इस तरह मामले में विपक्ष के आरोपों और आयोग के जवाब के बीच कानूनी विवाद जारी है।
इस मामले की पृष्ठभूमि में विपक्ष का SIR को लेकर चल रहा विरोध भी शामिल है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से कथित गलत नाम कटने और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य नेताओं की याचिका पर निर्वाचन आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगा था और इसे SIR से संबंधित पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश दिया था।
अब 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि अदालत के सामने चुनाव आयोग के हलफनामे पर विपक्षी नेताओं का जवाब और आयोग की ओर से दाखिल किए जाने वाले अतिरिक्त दस्तावेज होंगे। हालांकि, सुनवाई टलने का अर्थ याचिका पर अंतिम फैसला होना नहीं है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है और SIR प्रक्रिया की वैधता तथा उससे जुड़े आरोपों पर आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी।



