
हाल ही में कर्नाटक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और DGP डॉ. रामचंद्र राव अचानक सुर्खियों में आ गए हैं, लेकिन इस बार उनके एक वायरल वीडियो और विवादित पृष्ठभूमि को लेकर। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें कथित तौर पर वह अपने कार्यालय में एक महिला के साथ अश्लील हरकतें करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासन और राजनीति में हड़कंप मच गया है और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने गृह मंत्रालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी ने खुद इस वीडियो को “मॉर्फ्ड (संशोधित/फर्जी)” बताते हुए इसे एक साजिश का हिस्सा बताया है।
वीडियो में दिख रहे व्यक्ति डॉ. के. रामचंद्र राव हैं, जो कर्नाटक पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के निदेशक-महानिदेशक (DGP) हैं। वीडियो में वह पुलिस वर्दी में अपने कार्यालय में महिलाओं के साथ दिखाई दे रहे हैं, जिसकी वजह से देशभर में विरोध और आलोचना शुरू हो गई है। वीडियो को देखने के बाद कर्नाटक सरकार ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तुरंत जांच शुरू करने के आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से दिए हैं।
वायरल वीडियो को लेकर खुद रामचंद्र राव ने जवाब दिया कि यह फर्जी और मॉर्फ्ड फुटेज है जिसे सोशल मीडिया पर फैलाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है और उन्होंने इसे व्यक्तिगत व प्रशासनिक रूप से निशाना बनाये जाने वाला प्रयास बताया है।
इस वायरस वीडियो विवाद का पृष्ठभूमि उससे भी जुड़ा हुआ है कि रामचंद्र राव की सौतेली बेटी, कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव, पिछले साल बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार हुई थी। मार्च 2025 को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पर लगभग 14.2 kg सोने के साथ उसे पकड़ा गया था, जिसकी कीमत ₹12.56 करोड़ के करीब थी। अधिकारियों का कहना था कि वह दुबई से भारत लौटते समय इस सोने को अपने शरीर पर छिपाकर लाने की कोशिश कर रही थी।
उस समय Directorate of Revenue Intelligence (DRI) के अधिकारियों ने उसकी बार बार की विदेशी यात्राओं की वजह से संदेह जताया और एयरपोर्ट पर उसकी तलाशी ली। 27 यात्राओं का रिकॉर्ड था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि उससे पहले भी कई विदेश यात्राएँ की गई थीं।
रान्या राव के इस सोना तस्करी मामले में कई बड़े पहलू सामने आए थे। उसके बारे में यह भी बताया गया कि उसने व्यक्तिगत बिजनेस के बहाने से दुबई यात्रा करते समय सोना भारत लाने की कोशिश की थी, लेकिन अधिकारियों को पहले से सूचना होने के कारण उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
उस गिरफ्तारी से जुड़ी जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उसके कुछ सहयोगी और नेटवर्क शायद एक बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े थे। जांच एजेंसियों ने उसके घर से नगद राशि तथा सोने के अन्य सामान की जब्ती भी की थी, जिससे मामला और गहरा माना गया।
रामचंद्र राव खुद सोने की तस्करी की किसी भी गतिविधि से दूरी बनाए हुए थे और उन्होंने मीडिया के सामने कहा था कि उन्होंने इस घटना के बारे में मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से ही जानकारी प्राप्त की और उन्हें इस बारे में पहले कोई सूचना नहीं थी। उस समय उन्हें अनिवार्य अवकाश (compulsory leave) पर भी भेजा गया था, ताकि मामले की स्वतंत्र जांच की जा सके।
अब इस वायरल वीडियो वायरल होने के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, और यह मामला न केवल इंस्टिट्यूशनल ईमेज और प्रशासनिक अनुशासन से जुड़ा हुआ मामला बन गया है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट के प्रभाव और प्रतिष्ठित अधिकारियों की छवि पर पड़ने वाले प्रभाव को भी उजागर करता है।



