
ड्रोन हमले के बाद समुद्र में बिना क्रू के भटक रहा रूसी ऑयल टैंकर
मध्य समुद्र में एक गंभीर समुद्री और पर्यावरणीय संकट की आशंका पैदा हो गई है, जहां एक रूसी ऑयल टैंकर ड्रोन हमले के बाद बिना क्रू के कई दिनों से अनियंत्रित स्थिति में भटक रहा है। जानकारी के मुताबिक यह टैंकर कथित तौर पर यूक्रेन द्वारा किए गए समुद्री ड्रोन हमले का शिकार हुआ, जिसके बाद इसमें आग लग गई और जहाज को भारी नुकसान पहुंचा। हमले के बाद टैंकर के सभी लगभग 30 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन जहाज अब भी समुद्र में तैर रहा है और किसी के नियंत्रण में नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह टैंकर रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद तेल और गैस के परिवहन के लिए किया जाता है। हमले के कारण जहाज के ढांचे में बड़े छेद हो गए हैं और इसका पिछला हिस्सा पानी में झुक गया है, जिससे इसके डूबने या रिसाव का खतरा और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस टैंकर से तेल या गैस का रिसाव होता है तो यह बड़े पैमाने पर समुद्री प्रदूषण का कारण बन सकता है। जहाज में मौजूद भारी मात्रा में ईंधन, गैस और डीजल समुद्री जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसके अलावा आग लगने या विस्फोट की स्थिति में जहरीले धुएं का गुबार भी फैल सकता है, जिससे आसपास के तटीय इलाकों पर भी असर पड़ सकता है।
इटली और माल्टा समेत कई यूरोपीय देशों की नौसेनाएं इस टैंकर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जहाज को सुरक्षित स्थान तक खींचने (टो करने) के विकल्प पर विचार किया जा रहा है, लेकिन किसी भी देश ने इसे अपने बंदरगाह पर लाने से फिलहाल इनकार किया है, क्योंकि इसे “चलता-फिरता खतरा” माना जा रहा है।
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते समुद्री मार्गों पर हमलों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के तेल ढांचे और टैंकरों को निशाना बनाकर उसकी ऊर्जा आपूर्ति को कमजोर करने की रणनीति अपनाई है।
कुल मिलाकर, यह भटकता हुआ टैंकर न केवल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि वैश्विक पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में इसे सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करना दुनिया के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।



