
नई दिल्ली — कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) पर बुलडोजर चला दिया है, जिससे देश के ग्रामीण गरीबों, किसानों, मजदूरों और भूमिहीन जनता के हितों को भारी क्षति पहुँची है। उनका यह हमला संसद में पारित हाल ही के ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-G RAM G) बिल को लक्ष्य बनाकर आया है, जिसे उन्होंने “काला कानून” करार दिया है।
सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि मनरेगा योजना मूल रूप से राष्ट्रीय और जन-हित की एक अनूठी पहल थी, जिसका लाभ करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिला और यह योजना ग्रामीण विकास तथा रोजगार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए जीवन-रेखा साबित हुई थी जो गरीबी और बेरोजगारी की गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार लगातार इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही थी। हाल ही में पारित नए VB-G RAM G बिल के तहत मनरेगा का नाम बदल दिया गया, महात्मा गांधी का नाम हटाया गया और इसके मूल स्वरूप तथा उद्देश्य में बड़े बदलाव किए गए हैं। बिना विस्तृत सलाह-मशवरे के और विपक्ष को विश्वास में लिए इस कानून में बदलाव किया जाना ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों के हितों पर “आक्रामक हमला” है, ऐसा उन्होंने आरोप लगाया।
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि नए विधेयक से अब निर्णय — कौन, कितना और कहाँ रोजगार मिलेगा — यह दिल्ली से बैठकर तय किया जाएगा, जो जमीनी हकीकत से दूर है और स्थानीय ग्रामीण इकाइयों तथा पंचायतों की भूमिका को कमजोर करेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने पहले ग्राम पंचायतों को सशक्त किया था और लोगों को उनके गांव में रोजगार तथा जीवन-सुरक्षा का अधिकार दिया था।
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने याद किया कि करीब 20 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने मनरेगा को पारित कर ग्रामीण रोजगार को कानूनी अधिकार बनाया था, और उन्होंने स्वयं भी उस संघर्ष में शामिल थे। आज जब योजना को “बिना विचार-विमर्श के कमजोर” किया जा रहा है, तो कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता इसे वापस लेने के लिए पूरा संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित लोगों के लिए यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक प्रतिबद्धता है।
कांग्रेस के पिछले कुछ बयानों से भी पता चलता है कि उसकी नेताओं ने नए विधेयक की नीतिगत संरचना पर सवाल उठाए हैं और इसे ग्रामीण गरीबों के खिलाफ बताया है। राहुल गांधी ने भी VB-G RAM G बिल को “ग्रामीण गरीबों के खिलाफ” कदम बताया है और सरकार से इसे वापस लेने का आग्रह किया है।
वहीं, सरकार का कहना है कि मनरेगा में सुधार और नामकरण परिवर्तन से ग्रामीण रोजगार को और अधिक समावेशी तथा प्रभावी बनाया जा सकता है, हालांकि आलोचक इसे योजना का पतन मानते हैं और कहते हैं कि इससे मूल उद्देश्य खो जाएगा। विपक्ष ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया है और इसे संसद के बाहर भी जारी रखने की चेतावनी दी है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मुद्दे ने आगामी चुनावों के सियासी पटल पर बड़े बहस के विषय को जन्म दिया है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर। कांग्रेस ने इसे अपने बिजली के मुद्दों में से एक बनाया हुआ है, जबकि सरकार इसे “व्यापक सुधार” करार देती है।



