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भारत के लिए राहत की खबर

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए कुछ राहत भरी खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने संकेत दिया है कि वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) से गुजरने वाले सभी जहाजों को नहीं रोकेगा, बल्कि मुख्य रूप से अमेरिका, इज़राइल और यूरोपीय देशों से जुड़े तेल जहाजों को निशाना बना सकता है। ऐसे में भारत सहित कई एशियाई देशों के लिए तेल आपूर्ति पूरी तरह बाधित होने की आशंका फिलहाल कुछ कम हो सकती है।

दरअसल अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में बड़ा सैन्य तनाव पैदा हो गया है। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए गुजरने वाले जहाजों पर सख्त चेतावनी जारी की थी। इस जलमार्ग से गुजरने वाले अमेरिकी, इज़राइली या यूरोपीय देशों से जुड़े जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और यहीं से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है। अनुमान है कि वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।

हाल के दिनों में इस संकट के कारण जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है और कई टैंकर खाड़ी क्षेत्र में ही खड़े रह गए हैं। सुरक्षा जोखिम और बीमा कंपनियों के पीछे हटने की वजह से कई शिपिंग कंपनियों ने फिलहाल इस मार्ग का इस्तेमाल रोक दिया है। इससे वैश्विक तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। भारत के आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और उसका परिवहन अक्सर इसी जलमार्ग से होता है। इसलिए अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता तो भारत समेत कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर पड़ सकता था।

हालांकि ईरान द्वारा केवल पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की संभावना ने भारत और अन्य एशियाई देशों के लिए कुछ राहत दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिर भी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और यदि युद्ध और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसलिए दुनिया की नजरें फिलहाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य और मिडिल ईस्ट की बदलती स्थिति पर टिकी हुई हैं।

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