
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू हुए एक साल पूरा होने पर राज्य सरकार ने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए UCC (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू कर दिया है. यह संशोधन 27 जनवरी 2026 को ‘UCC दिवस’ पर लागू हुआ है, जब कानून लागू हुए एक साल पूरे हुए.
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अधिनियम, 2024 के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिश्ते और व्यक्तिगत कानूनी मामलों को एक सामान्य कानून में लाया गया था, और यह लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया था.
कानून के परिणाम और रिकॉर्ड पंजीकरण
एक साल में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, औसतन पहले जहां रोजाना लगभग 67 पंजीकरण होते थे, अब यह संख्या बढ़कर 1,400 से अधिक तक पहुंच गई है. इस दौरान लगभग 4.7 लाख से अधिक शादी के पंजीकरण और कुछ दर्जनों लिव-इन रिश्तों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं.
संशोधन अध्यादेश में किए गए मुख्य बदलाव
धोखाधड़ी और पहचान छिपाने पर दंड – अब शादी में पहचान छिपाने या गलत जानकारी देने को वैध विवाह को निरस्त करने और दंडात्मक प्रावधान का आधार बनाया गया है.
समय-सीमा पालन और दंडात्मक कार्रवाई – नियमों के तहत यदि विवाह या अन्य मामलों का पंजीकरण तय समय-सीमा के भीतर नहीं होता है, तो पहले जुर्माना और अब दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है.
अधिकारी शक्तियों में बदलाव – सब-रजिस्ट्रार नियत समय में कार्रवाई न करने पर मामला रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल के पास स्वतः चला जाएगा, और रजिस्ट्रार जनरल को अधिक अधिकार दिए गए हैं.
लिव-इन टर्मिनेशन सर्टिफिकेट – लिव-इन रिश्ते खत्म होने पर अब रजिस्ट्रार द्वारा टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा, और ‘विडो/विधवा’ की जगह ‘स्पाउज़’ शब्द का इस्तेमाल होगा.
लक्ष्य और सरकार का दृष्टिकोण
सरकार का दावा है कि ये संशोधन नागरिकों के अधिकारों, पारदर्शिता और न्याय की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए हैं, तथा राज्य में कानूनी प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल रूप देने में मदद करेंगे.



