
सऊदी अरब ने यमन (Yemen) के मुकल्ला बंदरगाह शहर (Mukalla port) पर हवाई हमला किया, जिसमें उसने दावा किया कि वह यूएई (UAE) से अलगाववादी समूह Southern Transitional Council (STC) के लिए भेजे गए हथियारों को निशाना बना रहा है। इस समूह को कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन प्राप्त है, और सऊदी अरब का कहना है कि यह हथियार क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा (security threat) बन रहे थे।
क्या हुआ?
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मंगलवार को मुकल्ला में हथियारों और लड़ाकू वाहनों के साथ जहाज़ों को लक्ष्य बनाकर हवाई हमले (airstrikes) किए।
सऊदी प्रेस एजेंसी के बयान के अनुसार, यह हथियार यूएई के फुजैरा (Fujairah) बंदरगाह से आए जहाज़ों द्वारा उतारे गए थे, जिन्हें सऊदी रणनीतिक रूप से खतरे के रूप में देखा गया।
सऊदी अरब का कहना है कि इस हमले का मकसद स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना (stability & security) है, और इसे एक ‘सीमित सैन्य अभियान’ बताया गया है।
परिणाम और प्रतिक्रिया
यमन की हूथी‑विरोधी ताकतों ने आपातकाल (state of emergency) की घोषणा की और कई स्थानों पर 72‑घंटे के लिए सीमाओं पर प्रतिबंध लगा दिया।
यमन के राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख ने UAE‑सहयोगी बलों को 24 घंटे में यमन छोड़ने का आदेश दिया और UAE के साथ रक्षा समझौते को रद्द कर दिया।
इस बमबारी ने सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव को बढ़ा दिया है, जो पहले से ही यमन की ग़ैर‑सरकारी दक्षिणी अलगाववादी ताकतों के समर्थन को लेकर मतभेद का सामना कर रहे हैं।
क्या यह व्यापक संघर्ष की ओर संकेत है?
विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम सिर्फ एक स्थानीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि खाड़ी सहयोगियों के बीच असहमति और प्रतिद्वंद्विता (Gulf rivalry) को उजागर करता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है।



