Advertisement
पश्चिम बंगाललाइव अपडेट
Trending

विधायक-सांसद खरीदकर TMC को नहीं झुकाया जा सकता

Advertisement
Advertisement

पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक संकट, विधायकों और सांसदों के बगावती तेवर तथा लगातार हो रही कानूनी कार्रवाई के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “विधायक और सांसद खरीदकर तृणमूल कांग्रेस को झुकाया नहीं जा सकता। हमारी पार्टी दबाव में आने वाली नहीं है।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल CID ने उन्हें एक बार फिर पूछताछ के लिए समन जारी किया है और पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है।

अभिषेक बनर्जी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों द्वारा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों और सांसदों को तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है, लेकिन टीएमसी के कार्यकर्ता और नेता किसी भी दबाव के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ताकत जनता का भरोसा है और उसे किसी भी राजनीतिक साजिश से खत्म नहीं किया जा सकता।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिल रहा है। पार्टी के कई विधायक और कुछ सांसद नेतृत्व से नाराज होकर अलग रुख अपनाते दिखाई दिए हैं। बागी नेताओं का दावा है कि उन्हें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का समर्थन हासिल है और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपने समर्थन से जुड़े दस्तावेज भी पेश किए हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रही है और इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है।

इसी बीच अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर भी बढ़ती नजर आ रही हैं। पश्चिम बंगाल CID ने कथित हस्ताक्षर जालसाजी (Signature Forgery) मामले में उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के लिए कुछ अतिरिक्त तथ्यों की पुष्टि जरूरी है, इसलिए उन्हें फिर से उपस्थित होने के लिए कहा गया है। इससे पहले भी उनसे कई घंटों तक पूछताछ की जा चुकी है। हालांकि अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है और किसी भी कठोर कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाई है।

अभिषेक बनर्जी ने CID के समन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और जांच में पूरा सहयोग देंगे। लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी को लगता है कि जांच एजेंसियों के जरिए तृणमूल कांग्रेस को कमजोर किया जा सकता है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से हर चुनौती का सामना करेगी।

राजनीतिक घटनाक्रम केवल अभिषेक बनर्जी तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी हाल के दिनों में लगातार राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। विपक्ष राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, संगठनात्मक संकट और प्रशासनिक विफलता के आरोप लगा रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता का समर्थन अब भी उनके साथ है और विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। यदि बागी नेताओं की संख्या बढ़ती है तो आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के लिए संगठनात्मक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। दूसरी तरफ यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लाने में सफल रहता है तो स्थिति बदल भी सकती है।

विपक्ष ने अभिषेक बनर्जी के बयान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य है तो लगातार विधायक और सांसद इस्तीफा क्यों दे रहे हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कुछ व्यक्तियों के जाने से पार्टी कमजोर नहीं होती और संगठन की जड़ें बंगाल की जनता के बीच बेहद मजबूत हैं। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि आने वाले दिनों में कार्यकर्ताओं के दम पर संगठन पहले से अधिक मजबूत होकर उभरेगा।

फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में हर दिन नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। अभिषेक बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी को एक साथ राजनीतिक बगावत, कानूनी चुनौतियों और विपक्ष के लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि CID जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है, पार्टी के भीतर चल रहा संकट कैसे सुलझता है और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस इन चुनौतियों का किस तरह सामना करती है। आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और भी दिलचस्प होने की संभावना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share