
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपना राजनीतिक कुनबा बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। 16 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई नेताओं के सपा में शामिल होने का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में भाजपा और अन्य दलों से जुड़े रहे नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी इसे आगामी चुनाव से पहले संगठन के विस्तार के रूप में देख रही है।
सपा में शामिल होने वाले नेताओं में राजपाल सैनी, हरबीर मलिक, पवन सैनी, शुभेंद्र आचार्य, संजीव प्रधान, राजेंद्र मलिक, विजेंद्र मलिक, शुभम मलिक और राजनेंद्र सिंह के नाम शामिल हैं। कार्यक्रम में पूर्व प्रत्याशी सिवान सैनी भी शामिल हुए। सपा सांसद इकरा हसन की मौजूदगी भी चर्चा में रही। इन नेताओं के पार्टी में आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा के संगठनात्मक विस्तार की कोशिशों को नई गति मिलने की बात कही जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों के जरिए वोटों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है और चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है। अखिलेश ने इन आरोपों के समर्थन में कथित फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं का मुद्दा उठाया। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
इस दौरान सपा कार्यालय में काले मटके भी रखे गए, जिन पर वोट चोरी, भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दे लिखे थे। अखिलेश यादव ने इन्हें भाजपा के खिलाफ अपने राजनीतिक विरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ जनता के मुद्दों को लगातार उठाया जाएगा। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
अखिलेश यादव ने विकास यादव नाम के एक युवक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उसके नाम पर दस वोट दर्ज हैं। उनके मुताबिक, यह मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का उदाहरण है। सपा प्रमुख ने इस मामले को चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए सवाल उठाए कि एक व्यक्ति के नाम पर कई प्रविष्टियां कैसे हो सकती हैं। इन दावों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित मतदाता रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के नतीजों की पुष्टि जरूरी है।
कार्यक्रम में सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने भी संबोधन दिया। उन्होंने किसानों और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर गन्ना किसानों का भुगतान 24 घंटे के भीतर किया जाएगा। यह पार्टी की ओर से किया गया राजनीतिक वादा है, जिसका वास्तविक क्रियान्वयन भविष्य में सरकार बनने और संबंधित नीतियों पर निर्भर करेगा।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से जुड़े सामाजिक-राजनीतिक गठजोड़ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इन वर्गों के बीच सपा का समर्थन बढ़ रहा है और पार्टी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी। भाजपा और चुनाव आयोग की भूमिका पर उनके आरोपों के बीच यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बहस बना हुआ है।
2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अलग-अलग दलों के नेताओं का पाला बदलना उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक तैयारियों का हिस्सा बन गया है। पश्चिमी यूपी के नेताओं को शामिल कराने और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने के जरिए समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति के संकेत दिए हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी का संगठन विस्तार किस तरह आगे बढ़ता है और मतदाता सूची को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित संस्थाएं क्या प्रतिक्रिया देती हैं।



