
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को आजमगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके PDA गठबंधन पर निशाना साधा। ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की शिकायतें सामने आईं, तब PDA के नेता क्या कर रहे थे।
ओवैसी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने हैदराबाद और तेलंगाना में मतदाताओं के नाम खोजने और उन्हें सूची में शामिल कराने में मदद की। ओवैसी के मुताबिक, उनकी पार्टी ने अपने राजनीतिक विरोधियों से भी मतदाता सूची में अपना नाम जांचने और जरूरत पड़ने पर पंजीकरण कराने की अपील की। वोटर लिस्ट से नाम हटने की संख्या को लेकर उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक आंकड़ों से तुलना जरूरी है।
AIMIM प्रमुख ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए पूछा कि PDA के समर्थकों को उनके नेताओं से क्या जवाब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रही। ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि उनकी पार्टी चुनावी मुकाबले से पीछे हटने वाली नहीं है और वह निष्पक्ष चुनाव में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। ये बयान ओवैसी के राजनीतिक आरोप हैं; इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
अपने भाषण में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के प्रतीक ‘लाल टोपी’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि लोग केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के पीछे चलते रहेंगे, तो उन्हें स्वतंत्र नेतृत्व का अवसर नहीं मिलेगा। उनका संदेश खास तौर पर मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अपने नेताओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित था। ओवैसी ने मतदाताओं से अपील की कि वे अपनी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम जरूर जांचें, ताकि चुनाव के समय मतदान के अधिकार को लेकर परेशानी न हो।
आजमगढ़ में ओवैसी की सभा को 2027 के चुनाव से पहले AIMIM की राजनीतिक गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी का प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। ऐसे में यहां जनसभा कर ओवैसी ने न केवल SIR का मुद्दा उठाया, बल्कि सपा के राजनीतिक आधार और विपक्षी दलों की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए।
ओवैसी ने अपने संबोधन में मुस्लिम समुदाय से पारंपरिक दलों पर निर्भर रहने के बजाय अपने राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत करने का आह्वान भी किया। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित उन दलों पर सवाल उठाए, जो खुद को भाजपा का विकल्प बताते हैं। उनका आरोप है कि चुनावों में समुदाय का समर्थन तो मांगा जाता है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं दी जाती। यह ओवैसी की राजनीतिक दलील है, जिस पर संबंधित दलों की अलग-अलग राय हो सकती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में SIR अब चुनावी बहस का एक प्रमुख मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में मतदाताओं के लिए आधिकारिक मतदाता सूची में अपना नाम जांचना और किसी त्रुटि की स्थिति में चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार का अनुरोध करना महत्वपूर्ण है।
आजमगढ़ की सभा के जरिए ओवैसी ने साफ संकेत दिया कि AIMIM आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करेगी। उनके बयानों से समाजवादी पार्टी और PDA पर दबाव बनाने की रणनीति झलकती है। हालांकि, इन आरोपों का चुनावी असर क्या होगा और अलग-अलग दलों की आगे की रणनीति कैसी रहेगी, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।



