Advertisement
बिहारलाइव अपडेट
Trending

‘गरीबों का मसीहा था मेरा बेटा, DSP को फांसी दो’

Advertisement
Advertisement

बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने पूरे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। इस बीच मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी का दर्द और गुस्सा खुलकर सामने आया है। उन्होंने अपने बेटे को गरीबों और वंचितों की आवाज बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके साथ अन्याय किया है। आशा देवी ने कहा कि उनका बेटा समाजसेवा करता था, लोगों की समस्याओं को उठाता था और गरीबों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं था। उन्होंने मामले के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों, विशेषकर डीएसपी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फांसी की सजा की मांग की है।

मीडिया से बातचीत के दौरान आशा देवी ने दावा किया कि उनके बेटे को बेहद करीब से गोली मारी गई। उनका कहना है कि भरत तिवारी ने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों के लिए आवाज उठाई और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर संघर्ष किया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उसे जानबूझकर निशाना बनाया। मां का कहना है कि यह कोई सामान्य मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित कार्रवाई थी, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

परिवार ने यह भी दावा किया है कि घटना के समय भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण जैसा व्यवहार किया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। भरत के भाई चंदन तिवारी ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने पहले बातचीत की और फिर अचानक कार्रवाई कर दी। परिवार का कहना है कि पूरी घटना के वीडियो और अन्य सबूत मौजूद हैं, इसलिए दोषियों के खिलाफ सीधे हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

मामले ने तूल तब और पकड़ लिया जब बिहार सरकार को न्यायिक जांच के आदेश देने पड़े। राज्य सरकार ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इस बीच विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि यदि पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई है तो जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन यदि कहीं भी शक्ति का दुरुपयोग हुआ है तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

आशा देवी ने यह भी कहा कि उन्हें राज्य की व्यवस्था से ज्यादा उम्मीद नहीं है और वे अदालत तथा केंद्र सरकार से न्याय की उम्मीद कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे का मोबाइल फोन पुलिस के कब्जे में है और उसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां हो सकती हैं। परिवार का मानना है कि इन्हीं तथ्यों से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में भी लोगों के बीच गुस्सा देखा गया है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि भरत तिवारी सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहता था और लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाता था। यही कारण है कि उसकी मौत के बाद बड़ी संख्या में लोग परिवार के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। दूसरी ओर पुलिस का पक्ष है कि पूरे मामले की जांच चल रही है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।

इस पूरे प्रकरण ने बिहार में पुलिस कार्रवाई, जवाबदेही और मानवाधिकारों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। जहां एक तरफ परिवार इसे न्याय की लड़ाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार न्यायिक जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने की बात कर रही है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह मुठभेड़ कानून के दायरे में हुई कार्रवाई थी या फिर परिवार के आरोपों में कितना दम है। फिलहाल भरत तिवारी की मां की एक ही मांग है— उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और परिवार को न्याय मिले।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share