
‘देश में 8 बार हो चुका है SIR’, भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी के आरोपों पर उठाए सवाल
राजस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही, बल्कि पहले भी आठ बार विशेष पुनरीक्षण किया जा चुका है। यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का दावा करने वालों को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य भी सामने रखने चाहिए।
भूपेंद्र यादव के मुताबिक, मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। उनके अनुसार, देश में 1952, 1957, 1961, 1965-66, 1973-74, 1977-79, 1992-95 और 2002-05 के दौरान अलग-अलग चरणों में विशेष पुनरीक्षण किया गया था। उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया को इसी सिलसिले का हिस्सा बताया।
राहुल गांधी की ओर से SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठाए गए सवालों पर यादव ने कहा कि केवल संदेह जताना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विपक्ष से उन मामलों का विवरण देने को कहा, जहां कथित तौर पर गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए हों। यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रक्रिया पर सवाल तो उठा रहा है, लेकिन उसे अपनी शिकायतों के समर्थन में स्पष्ट प्रमाण भी पेश करने चाहिए। यह केंद्रीय मंत्री का पक्ष है, जबकि विपक्ष इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और संभावित मतदाता विलोपन को लेकर चिंता जताता रहा है।
फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर भी यादव ने विपक्ष से सवाल किए। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब 15 लाख मतदान केंद्रों में से कम से कम 1,000 बूथों के ऐसे बूथ लेवल एजेंटों की सूची सामने रखी जाए, जिन्होंने गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायत की हो। उनका तर्क था कि यदि ऐसी घटनाएं हुई हैं, तो संबंधित बूथों और शिकायतों का विवरण जांच के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए। हालांकि, यह चुनौती अपने आप में आरोपों के सही या गलत होने का अंतिम प्रमाण नहीं है।
मंत्री ने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के बीच अंतर भी समझाया। उनके अनुसार, फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 के जरिए किसी



