
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब CBSE की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और पोर्टल में आई तकनीकी खामियों को लेकर लगातार विवाद चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब 12वीं के छात्रों ने री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच से जुड़े पोर्टल पर कई समस्याओं की शिकायत की। छात्रों ने पोर्टल क्रैश होने, भुगतान में दिक्कत, गलत या धुंधली स्कैन कॉपियां मिलने और आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों का आरोप लगाया। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की थी।
मामला और गंभीर तब हो गया जब CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कथित सुरक्षा खामियों और अनधिकृत पहुंच की खबरें सामने आईं। बोर्ड ने स्वीकार किया था कि उसके सेवा प्रदाता के OSM पोर्टल में कुछ कमजोरियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए गए। इसी बीच पोर्टल पर साइबर हमलों और DoS (Denial of Service) अटैक की भी जानकारी सामने आई।
हालांकि तकनीकी दिक्कतों के कारण री-इवैल्यूएशन पोर्टल के लॉन्च में देरी हुई, लेकिन बाद में CBSE ने पोर्टल सक्रिय कर दिया। बोर्ड के अनुसार, हजारों छात्रों ने आवेदन जमा किए हैं और प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए अतिरिक्त तकनीकी उपाय किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 6 जून निर्धारित की गई है।
सरकार ने अब पूरे OSM और डिजिटल मूल्यांकन तंत्र की जांच के आदेश दिए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि तकनीकी गड़बड़ियां, सुरक्षा खामियां और खरीद प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है। इसी पृष्ठभूमि में CBSE के शीर्ष अधिकारियों का तबादला एक बड़े प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।



