
CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के बीच अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की लंबी बैठक
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में CJP के ‘संसद चलो’ मार्च और प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच कई घंटे तक चली अहम बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। यह बैठक ऐसे समय हुई जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर कूच कर रहे थे और राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक संसद भवन परिसर स्थित कार्यालय में हुई, हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि CJP पिछले कई सप्ताह से कथित परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। इसी क्रम में संगठन ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग, जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें सामने आईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील समय में अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की लंबी बैठक को सामान्य प्रशासनिक बैठक से अधिक महत्व दिया जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से बैठक के एजेंडे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि संसद सत्र, जारी विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई होगी। विपक्ष भी इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर उठाने की तैयारी कर रहा है।
इस बीच CJP की ओर से दावा किया गया कि सरकार ने बातचीत की पहल की है। संगठन के प्रतिनिधियों ने भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगें उनके सामने रखीं। इनमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, परीक्षा प्रणाली में सुधार और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल बताए गए। बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि सरकार ने उनकी बात सुनी है, लेकिन अभी किसी मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। दूसरी ओर सरकार की ओर से भी संवाद जारी रखने के संकेत दिए गए हैं, जिससे आंदोलन के समाधान की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
दिल्ली में प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरती। संसद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई, जबकि कुछ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार भी एहतियातन अस्थायी रूप से बंद किए गए। पूरे घटनाक्रम के बीच अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की लंबी बैठक को सरकार की रणनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत तथा संसद में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।



