
CJP के तीनों नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा
दिल्ली में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के बाद रविवार को रिहा कर दिया गया। तीनों को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लिया था। रविवार को उन्हें दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां शांति बनाए रखने की शर्त पर उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, तीनों नेताओं को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धाराओं के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। वे मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और विमान के उतरने के बाद उन्हें एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया। यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं के मद्देनजर की गई थी।
रिहाई के लिए तीनों नेताओं को एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर 50 हजार रुपये का जमानती बांड भरना पड़ा। पुलिस के अनुसार, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और फिर रिहा कर दिया गया। इस शर्त के तहत उन्हें ऐसी गतिविधियों से बचना होगा, जिन्हें शांति भंग करने वाला माना जा सकता है।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। ये आरोप हैं; इस मामले में संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक पक्ष और तथ्यों का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी है।
तीनों नेताओं की हिरासत के बाद CJP से जुड़े लोगों ने उनके ठिकाने और तत्काल रिहाई की मांग उठाई थी। शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन की कोशिशों के बीच कई प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं को भी हिरासत में लिया गया था। राजधानी के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी, जबकि जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन को लेकर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई।
CJP की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विरोध जारी रखने की बात कही गई है। हालांकि, तीनों नेताओं की रिहाई के बाद आगे के प्रदर्शन का कार्यक्रम क्या होगा, इस पर उपलब्ध रिपोर्टों में अंतिम और स्पष्ट जानकारी नहीं है। नेताओं की ओर से आगे की रणनीति साझा किए जाने पर स्थिति और साफ हो सकती है।
इस घटनाक्रम ने दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति, कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर प्रशासन का कहना है कि संभावित अव्यवस्था रोकने के लिए एहतियाती कदम जरूरी थे, वहीं प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आगे इस मामले में पुलिस और CJP के बयानों पर नजर रहेगी।



