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जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का प्रदर्शन

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दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग का इलाका शनिवार को एक बार फिर बड़े राजनीतिक प्रदर्शन का केंद्र बन गया, जहां ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बैनर तले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया। संसद भवन के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल, अर्धसैनिक जवानों की तैनाती, कई परतों वाली बैरिकेडिंग और आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच की गई। सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और संसद क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान संसद की ओर मार्च करने की संभावना को देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क थी। इसी कारण संसद मार्ग, रफी मार्ग और आसपास के संवेदनशील इलाकों में बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। कई स्थानों पर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यातायात भी पूरी तरह बाधित न हो।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अनुमति दी, लेकिन सुरक्षा घेरा तोड़ने या प्रतिबंधित क्षेत्रों की ओर बढ़ने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए पहले से व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार संसद सत्र और संवेदनशील सरकारी संस्थानों को देखते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई। पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी गई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं हालात पर नजर बनाए हुए थे।

प्रदर्शन के कारण आम लोगों को भी कुछ असुविधा का सामना करना पड़ा। कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया, जबकि सुरक्षा कारणों से केंद्रीय दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया। यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों और अन्य मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियात के तौर पर उठाया गया ताकि बड़ी भीड़ के बीच किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती उत्पन्न न हो।

इस बीच प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने की बात कह रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था और संसद की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या सुरक्षा व्यवस्था में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हाल के दिनों में इसी आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों के बाद कई प्राथमिकी भी दर्ज की जा चुकी हैं और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही हैं।

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