
हरियाणा के वरिष्ठ IAS अधिकारी डी सुरेश से जुड़े गुरुग्राम प्लॉट आवंटन मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। राज्य के स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) ने कथित तौर पर नियमों के विपरीत दो HSVP प्लॉटों के पुनः आवंटन से जुड़े मामलों में डी सुरेश समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। दोनों मामलों में आरोप 2017 से 2019 के बीच के फैसलों से जुड़े हैं, जब डी सुरेश हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के पद पर थे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, विवाद गुरुग्राम के सेक्टर-23 और सेक्टर-39 स्थित HSVP के दो प्लॉटों से जुड़ा है। आरोप है कि इन जमीनों का पहले से आवंटन हो चुका था, इसके बावजूद बाद में नियमों और उपलब्ध कानूनी राय की अनदेखी करते हुए इन्हें दूसरे लोगों के नाम आवंटित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। ACB के अनुसार, दोनों मामलों में डी सुरेश की भूमिका इसलिए सामने आई क्योंकि संबंधित पुनः आवंटन को मंजूरी देने वाली प्रक्रिया में उनके आदेश या निर्णय शामिल थे।
पहले मामले में सेक्टर-39 के प्लॉट नंबर 257A का विवाद है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्लॉट के आवंटन को लेकर पहले कानूनी आपत्तियां सामने आई थीं और हाईकोर्ट में भी संबंधित याचिका पर राहत नहीं मिली थी। इसके बावजूद 2019 में दोबारा आवंटन की सिफारिश की गई और बाद में प्लॉट आवंटित कर दिया गया। ACB ने इस मामले में सरकारी अधिकारियों के साथ निजी व्यक्ति को भी आरोपी बनाया है।
दूसरा मामला सेक्टर-40 के प्लॉट नंबर 833A से संबंधित है। इस मामले में भी पहले दावे को लेकर आपत्तियां और कानूनी कार्यवाही हुई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बावजूद बाद में आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, पात्रता 200 वर्ग मीटर के प्लॉट की थी, जबकि 220 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया और बाद में इसे दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया।
दोनों FIR में डी सुरेश के अलावा अन्य अधिकारियों और निजी लोगों के नाम भी शामिल हैं। ACB ने आरोपों में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े प्रावधान लगाए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का विषय हैं और FIR में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि FIR दर्ज होने का घटनाक्रम डी सुरेश की सेवानिवृत्ति के ठीक पहले का है। उनके पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में इन FIR को चुनौती देते हुए कार्रवाई को कथित तौर पर ‘विच हंट’ बताया गया और आरोप लगाया गया कि इससे उनके रिटायरमेंट लाभ प्रभावित हो सकते हैं। वहीं सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि कार्रवाई में दुर्भावना नहीं थी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया।
अब इस मामले में ACB की जांच अहम होगी, क्योंकि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित प्लॉटों के पुनः आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और फैसलों में शामिल अधिकारियों तथा लाभार्थियों की क्या भूमिका थी। इस प्रकरण ने गुरुग्राम में HSVP की जमीनों के आवंटन और प्रशासनिक फैसलों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।



