Advertisement
दिल्ली (यूटी)लाइव अपडेट
Trending

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: मलबे में जिंदगियां तलाशती रही टीम

Advertisement
Advertisement

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को हुए 5 मंजिला इमारत हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही यह इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई। हादसे के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, NDRF और अन्य राहत एजेंसियों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया।

हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में निर्माण और मरम्मत से जुड़े कामों को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था। इसी दौरान पानी जमा होने और कमजोर नींव जैसी संभावनाओं की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इमारत गिरने की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी मालिक की तलाश में दिल्ली और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में निर्माण या मरम्मत का काम किस अनुमति के तहत कराया जा रहा था और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।

हादसे के बाद राहत और बचाव टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारी मलबे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचना थी। NDRF और अन्य एजेंसियों ने हाइड्रोलिक जैक, कॉम्बी कटर, डायमंड चेन सॉ, लाइफ डिटेक्टर और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाया। बेहद सावधानी से मलबे के हिस्सों को काटकर रास्ता बनाया गया, ताकि अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय इमारत में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद हो सकते थे। स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अनुसार, यह परिसर छात्रों के रहने के लिए PG के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से हादसे के तुरंत बाद कई परिवार अपने बच्चों की जानकारी लेने के लिए घटनास्थल और अस्पतालों तक पहुंचे।

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG तथा निजी हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में हादसे ने इस इलाके में चल रहे छात्र आवासों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह जांचने की दिशा में भी बढ़ रहा है कि आसपास की ऐसी इमारतों में निर्माण, बेसमेंट और संरचनात्मक बदलाव नियमों के मुताबिक किए गए हैं या नहीं।

फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनकी भूमिका तय करने पर है। मालिक के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ यह भी जांचा जा रहा है कि निर्माण या मरम्मत के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं। अगर जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित लोगों पर आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

सत्य निकेतन हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि दिल्ली में छात्र आवासों और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। अब जांच के जरिए यह सामने आना बाकी है कि आखिर वह कौन-सी चूक थी, जिसने एक 5 मंजिला इमारत को अचानक मलबे में बदल दिया और इतने लोगों की जान को खतरे में डाल दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share