
मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 25 हजार बच्चे कुपोषण की समस्या से प्रभावित हैं। इनमें 5 हजार से ज्यादा बच्चे अति गंभीर कुपोषण यानी Severe Acute Malnutrition (SAM) श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा करीब 19 हजार से ज्यादा बच्चों को कम वजन की श्रेणी में चिन्हित किया गया है।
आंकड़ों के सामने आने के बाद धार में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक कम वजन और गंभीर कुपोषण बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर डाल सकता है। विभाग की ओर से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार और पोषण प्रबंधन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में प्रभावित बच्चों के कारण चुनौती अभी भी गंभीर बनी हुई है।
गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र यानी NRC भी संचालित है। पिछले करीब पांच महीनों में यहां लगभग 250 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कर इलाज किया गया। ऐसे बच्चों में उम्र के हिसाब से बेहद कम वजन, कमजोरी और संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आईं। उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में विशेष पोषण आहार, दवाएं और जरूरी उपचार दिया जाता है।
समय पर पहचान और इलाज से बच्चों की स्थिति में सुधार भी संभव है। धार के खेड़ी बलवारी गांव की साढ़े तीन वर्षीय बच्ची परी का मामला इसका उदाहरण है। गंभीर कुपोषण की पहचान के बाद उसे पोषण पुनर्वास कार्यक्रम से जोड़ा गया। लगातार निगरानी, पौष्टिक आहार और चिकित्सकीय देखरेख के बाद उसके वजन और स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किया गया।
पोषण पुनर्वास केंद्र में सिर्फ बच्चों का इलाज ही नहीं किया जाता, बल्कि उनकी माताओं और परिवार के सदस्यों को भी पोषण और देखभाल से जुड़ी जानकारी दी जाती है। बच्चों को उच्च प्रोटीन वाला आहार, मल्टीविटामिन और जरूरी दवाएं दी जाती हैं। डिस्चार्ज के समय परिवारों को घर पर उपलब्ध संसाधनों से पौष्टिक भोजन तैयार करने और बच्चों की बेहतर देखभाल के बारे में भी समझाया जाता है।
धार जिले में बच्चों की निगरानी की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी नेटवर्क पर भी है। उपलब्ध विभागीय जानकारी के मुताबिक जिले में हजारों आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों के वजन और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े दर्ज किए जाते हैं। गंभीर मामलों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है, जबकि दूसरे बच्चों की निगरानी और पोषण संबंधी सहायता समुदाय स्तर पर जारी रहती है। केंद्र सरकार के मुताबिक POSHAN Tracker बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट की पहचान और पोषण सेवाओं की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कुपोषण की चुनौती के बीच पोषण आहार की नियमित आपूर्ति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक धार में करीब तीन महीने तक पोषण आहार की आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति रही। छह महीने से तीन साल तक के बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से टेक-होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसकी नियमित उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
कुपोषण का कारण केवल भोजन की कमी नहीं माना जाता। स्वास्थ्य, स्वच्छता, संक्रमण, टीकाकरण, परिवार की आर्थिक स्थिति और पोषण संबंधी जागरूकता जैसे कई कारक बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए बच्चों को पर्याप्त और संतुलित आहार देने के साथ साफ-सफाई, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार पर भी ध्यान देना जरूरी है।
हालांकि, POSHAN Tracker के राष्ट्रीय आंकड़ों में मध्य प्रदेश में बच्चों के स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट के प्रतिशत में अक्टूबर 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सुधार दर्ज किया गया है। इसके बावजूद धार जैसे जिलों में बड़ी संख्या में बच्चों का कुपोषित या कम वजन की श्रेणी में होना बताता है कि स्थानीय स्तर पर पोषण संबंधी चुनौतियां अभी भी गंभीर हैं। ऐसे में प्रभावित बच्चों की लगातार पहचान, पोषण आहार की नियमित आपूर्ति और गंभीर मामलों के समय पर इलाज पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
धार में सामने आए ये आंकड़े सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के लिए ही नहीं, बल्कि परिवारों और स्थानीय प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती हैं। करीब 25 हजार बच्चों के कुपोषण और 5 हजार से ज्यादा बच्चों के SAM श्रेणी में होने के बीच अब सबसे अहम सवाल यही है कि इन बच्चों तक पोषण, उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं कितनी तेजी से और नियमित रूप से पहुंचाई जाती हैं।



