
Flydubai Flight 1073: इजरायल में विमान क्रैश कराने का था इरादा?
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुए गंभीर कॉकपिट हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले से जुड़ी नई जानकारियां सामने आ रही हैं। अब सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि फ्लाइट के ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसका इरादा विमान को इजरायल में क्रैश कराने का था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की आधिकारिक जांच अभी जारी है।
हमाम अल-हम्मामी पर आरोप है कि उसने उड़ान के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। उपलब्ध उड़ान आंकड़ों के मुताबिक विमान करीब 30 सेकंड में 16 हजार फीट से ज्यादा नीचे चला गया था। स्थिति बिगड़ने के बाद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद की।
इस घटना के बाद विमान को अपने निर्धारित गंतव्य तेल अवीव के बजाय सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ दिया गया। विमान में मौजूद रिजर्व पायलटों ने भी नियंत्रण संभालने में मदद की और आखिरकार फ्लाइट को सुरक्षित रूप से उतारा गया। विमान में 172 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे और सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है। कैप्टन स्मित मच्छार को भी इलाज के बाद चिकित्सा मंजूरी मिल गई थी।
जांच में सामने आई एक और अहम जानकारी हमाम अल-हम्मामी के पुराने विमानन करियर से जुड़ी है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसे पहले ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था। उसके खिलाफ कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारों से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं सामने आई थीं। इसके बावजूद बाद में उसने फ्लाईदुबई में नौकरी हासिल की और संवेदनशील दुबई-तेल अवीव रूट पर को-पायलट के तौर पर उड़ान भरी। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ओमान की ओर से जताई गई चिंताओं की जानकारी दूसरे देशों या एयरलाइनों के साथ साझा की गई थी या नहीं।
रिपोर्टों के अनुसार, हमाम अल-हम्मामी ओमान का नागरिक है और उसका जन्म संयुक्त अरब अमीरात में हुआ था। उसके पुराने करियर रिकॉर्ड को लेकर भी जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि वह पहले ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन से जुड़ा था और बाद में उसे उड़ान संबंधी जिम्मेदारियों से हटाकर दूसरे काम में लगाया गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसके पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा घटना के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं।
घटना के बाद हमाम अल-हम्मामी को सऊदी अरब में हिरासत में लिया गया था और बाद में उसे संयुक्त अरब अमीरात भेजे जाने की जानकारी सामने आई। अब यूएई के नेतृत्व में मामले की जांच चल रही है, जिसमें इजरायली अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। जांच का मुख्य फोकस घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, को-पायलट का मकसद क्या था और क्या इस हमले की पहले से कोई योजना बनाई गई थी, जैसे सवालों पर है। साथ ही संभावित आतंकी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
यूएई के अधिकारियों ने मामले को लेकर विशेष जांच टीम गठित की है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कॉकपिट में हुई घटना का किसी आतंकी गतिविधि या पहले से बनाई गई योजना से संबंध था या नहीं। विमान यूएई में पंजीकृत है, इसलिए मामले की जांच में वहां की एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने से पहले अपुष्ट जानकारियों या अटकलों को तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर पायलटों की पृष्ठभूमि जांच, अलग-अलग देशों के बीच सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय रूट पर क्रू की तैनाती की प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। इजरायल पहले ही पायलटों की सुरक्षा जांच को और सख्त करने की बात कह चुका है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले यह कहना जल्दबाजी होगी कि सुरक्षा व्यवस्था में वास्तव में कहां और किस स्तर पर चूक हुई।
फिलहाल फ्लाइट FZ1073 से जुड़े मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। को-पायलट का वास्तविक मकसद क्या था, क्या विमान को जानबूझकर इजरायल में क्रैश कराने की योजना थी, उसके पुराने रिकॉर्ड की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक कैसे पहुंची और घटना के पीछे कोई अन्य व्यक्ति या संगठन था या नहीं—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इस बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कॉकपिट में हुई हिंसक घटना के बावजूद यात्रियों, चालक दल और अन्य पायलटों की मदद से विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतार लिया गया।


