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होर्मुज जलडमरूमध्य बना ‘तेल का हथियार

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मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस रणनीतिक रास्ते को जल्द खोलने के मूड में नहीं है और इसे अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह जलमार्ग ईरान की “सबसे बड़ी ताकत” बन चुका है, जिसके जरिए वह वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिका दोनों पर प्रभाव डाल रहा है।

दरअसल, फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण मजबूत कर लिया है। यह वही रास्ता है, जिससे दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। ईरान ने जहाजों पर हमले, समुद्र में बारूदी सुरंगें और सख्त नियंत्रण जैसे कदम उठाकर इसे लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

इस संकट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुनिया में महंगाई और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।

इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मुद्दे पर आक्रामक बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका चाहे तो इस जलमार्ग को “आसानी से खोल सकता है” और इससे भारी आर्थिक फायदा भी उठा सकता है। उनके इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं।

हालांकि, जमीनी स्थिति काफी जटिल है। विश्लेषकों का कहना है कि भले ही अमेरिका समुद्र में नियंत्रण हासिल कर ले, लेकिन ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता के जरिए लंबे समय तक खतरा बनाए रख सकता है। यही वजह है कि इस संकट का समाधान आसान नहीं दिख रहा।

वहीं, कुछ जहाजों ने वैकल्पिक रास्तों से गुजरने की कोशिश जरूर की है, लेकिन जोखिम अब भी बना हुआ है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और देश इस जलमार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बन चुका है। ईरान इसे अपनी ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे खुलवाने के लिए दबाव बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संकट दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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