
भारत के पासपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर अपनी शक्ति और मान्यता में उल्लेखनीय सुधार किया है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के नवीनतम डेटा में भारत का पासपोर्ट पिछले साल के 85वें स्थान से उभरकर 75वें स्थान पर पहुँच गया है, जिससे यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की सूची में 10 पायदान ऊपर रहा है। यह रैंकिंग वैश्विक यात्रा-स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता की दिशा में भारतीय नागरिकों के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस सूचकांक में पासपोर्ट की “शक्ति” यह दर्शाती है कि उसके धारक कितने देशों में वीज़ा-फ्री, वीज़ा-ऑन-अराइवल या ई-वीज़ा सुविधाओं के साथ प्रवेश कर सकते हैं। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय पासपोर्टधारक अब लगभग 56 देशों में बिना पूर्व वीज़ा हासिल किए यात्रा कर सकते हैं, जो उन्हें व्यापार, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय संवाद के अवसरों को व्यापक रूप से बढ़ाने में मदद करता है।
हालाँकि भारत का अब रैंक 75वाँ है, यह अभी भी उसके सर्वाधिक इतिहासिक स्थान (71वाँ, 2006) की तुलना में थोड़ा पीछे है, लेकिन हाल की प्रगति उसे वैश्विक यात्रा-स्वतंत्रता के मानचित्र पर फिर से मजबूत स्थिति देती है। भारत की यह छलांग पिछले कुछ वर्षों में हुई विविध रैंकिंग उतार-चढ़ाव का परिणाम है, जिसमें वह 2024 में 80वें और 2025 में 85वें स्थान पर था।
सिंगापुर ने इस सूचकांक में दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बनाया हुआ है, जहाँ उसके पासपोर्टधारक लगभग 192 देशों में बिना वीज़ा प्रवेश कर सकते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया दूसरे स्थान पर हैं, जिनके पासपोर्टधारकों को लगभग 187 देशों में बिना वीज़ा प्रवेश मिलता है। यूरोपीय देश जैसे स्वीडन, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली और अन्य कई देशों की पासपोर्ट शक्ति भी भारतीय पासपोर्ट से काफी ऊपर है, जो वैश्विक स्तर पर यात्रा-स्वतंत्रता में अंतर दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार न केवल भारतीय विदेश नीति के कई समझौतों और द्विपक्षीय सौदों का संकेत है, बल्कि यह वैश्विक गतिशीलता और भारतीय नागरिकों की यात्रा-सुविधा में भी वृद्धि का प्रतीक है। इससे भारतीय छात्रों, व्यवसायियों और यात्रियों को विदेश में रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के अवसरों से लाभ उठाने में मदद मिलेगी।



