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क्या थमेगा लेबनान और इज़राइल का युद्ध?

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच लेबनान और इज़राइल के बीच लंबे समय से चल रही हिंसा को रोकने के लिए अमेरिका में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि सीधे बातचीत करने वाले हैं जो पिछले कई दशकों में बहुत कम देखने को मिला है अमेरिका के विदेश मंत्री की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य युद्धविराम की दिशा में ठोस कदम उठाना और सीमा पर बढ़ती हिंसा को रोकना है हालांकि हालात बेहद जटिल बने हुए हैं और किसी ठोस नतीजे की उम्मीद अभी भी सीमित मानी जा रही है

दरअसल पिछले कुछ हफ्तों में लेबनान और इज़राइल के बीच संघर्ष काफी तेज हो गया है इज़राइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं जबकि जवाब में हिजबुल्लाह ने भी इज़राइल पर रॉकेट दागे हैं इस हिंसा में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब इसे लेकर सक्रिय हो गया है और शांति बहाली के प्रयास तेज कर दिए गए हैं

अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम लागू करना और आगे की शांति प्रक्रिया के लिए रास्ता तैयार करना है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों पक्ष अपनी अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं लेबनान जहां तत्काल युद्धविराम चाहता है वहीं इज़राइल का कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह को पूरी तरह कमजोर या निरस्त्र नहीं किया जाता तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है यही वजह है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही मतभेद साफ नजर आ रहे हैं

इस पूरी प्रक्रिया में एक और बड़ी बाधा हिजबुल्लाह का रुख है जिसने इन वार्ताओं का खुलकर विरोध किया है संगठन का कहना है कि ये बातचीत बेकार है और इससे लेबनान को कोई फायदा नहीं होगा उसने सरकार से इन चर्चाओं से दूर रहने की अपील भी की है ऐसे में लेबनान सरकार के सामने भी एक चुनौती खड़ी हो गई है कि वह आंतरिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय उम्मीदों के बीच संतुलन कैसे बनाए

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐतिहासिक जरूर है लेकिन इससे तुरंत युद्ध खत्म हो जाएगा ऐसा मानना जल्दबाजी होगी दोनों देशों के बीच अविश्वास बहुत गहरा है और जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं इसके बावजूद यह बातचीत एक सकारात्मक शुरुआत मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय बाद दोनों पक्ष एक मंच पर आकर सीधे संवाद कर रहे हैं अगर यह पहल सफल होती है तो इससे पूरे क्षेत्र में शांति की दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है

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